राजा नाहर सिंह को अंग्रेज 'आयरन वॉल ऑफ दिल्ली' क्यों कहते थे? अभी जाने

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हम हरियाणा के उस राजा की बात कर रहें हैं, जिसका नाम सुनकर अंग्रेज कांप जाते थे। हम उसी जाट राजा की बात कर रहें हैं, जिसने हरियाणा के बल्लभगढ़ के तालाब को अंग्रेजों के खून से लाल कर दिया था। जी हाँ बात कर रहे हैं हरियाणा के बल्लभगढ़ के राजा और 1857 की स्वतंत्रता क्रांति के प्रमुख राजा नाहर सिंह की।


राजा नाहर सिंह को अंग्रेज आयरन वॉल ऑफ दिल्ली क्यों कहते हैं? जाने

हरियाणा के बल्लभगढ़ के राजा नाहर सिंह ने अंग्रेजों को 134 दिनों तक दिल्ली में घुसने नहीं दिया था। उस समय अंग्रेजों का भारत पर शासन था, लेकिन राजा नाहर की वीरता, रणकौशल और शौर्य से अंग्रेज कांपते थे। 

जब भी अंग्रेज दिल्ली में घुसने की तैयारी करते तो राजा नाहर सामने आकर खड़े हो जाते थे, ऐसे करके लगातार 134 दिन तक अंग्रेज दिल्ली में घुस नहीं पाए थे। इसलिए अंग्रेज उनको आयरन वॉल ऑफ दिल्ली कहने लग गए।


धोखे से पकड़कर फांसी दी थी अंग्रेजों ने राजा नाहर सिंह को


जब अंग्रेजों के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ने के लिए 1857 में मुगलों के शासक बहादुर शाह जफर को दिल्ली की गद्दी पर बैठाया गया, तो उस समय बहादुर शाह जफर की सुरक्षा की जिम्मेदारी राजा नाहर सिंह को सौंपी गई थी।

अंग्रेजों ने अपनी चाल चलते हूए बहादुर शाह जफ़र से संधि की बात की। बहादुर शाह जफर की ओर राजा नाहर सिंह अंग्रेजों ने लाल किले में बुलाया। जैसे ही राजा नाहर सिंह लाल किले में घुसे उसी समय अंग्रेजों ने उनको गिरफ्तार कर लिया था।

हरियाणा के पलवल में सरकारी खजाने को लूटने के आरोप में उन पर अंग्रेजों ने एक झूठा मुकदमा चलाया। यह मुकदमा इलाहाबाद हाईकोर्ट में चलाया गया था। 9 जनवरी 1857 को राजा नाहर सिंह के साथ उनके साथियों को दिल्ली के चांदनी चौक के लालकुआं पर सरेआम फांसी दे दी गई थी।

उसके बाद 9 जनवरी राजा नाहर सिंह के बलिदान दिवस के रूप में भी मनाया जाता हैं। दिल्ली के चांदनी चौक में राजा नाहर सिंह का स्मारक भी बना हुआ है। हर साल 9 जनवरी को उनके बलिदान दिवस पर उनको श्रद्धांजलि दी जाती हैं।

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  1. 9 जनवरी 1858 को राजा नाहर सिंह तेवतिया जी शहीद हुए थे,,,,

    9 जनवरी 1945 को सर छोटूराम जी का देहांत हुआ था,,,

    एक वीरता के लिए याद किए जाते है और दूसरे कृषक कल्याण के लिए याद किए जाते हैं-

    सत सत नमन , जय जाट पुरख ।।

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