1857 की क्रांति के महान स्वंतत्रता सेनानी राजा नाहर सिंह कौन थे ,जाने के उनकी वीरता की कहानी

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बल्लभगढ़, हरियाणा। आज हम भारत के ऐसे राजा के बारे में बात कर रहे हैं, जिसकी वीरता और शौर्य को देखकर अंग्रेज भी कांप उठते थे। हम 1857 की स्वंतत्रता क्रांति के उस राजा की बात कर रहें हैं, जिसने अंग्रेजों को हराकर अपने आस-पास के क्षेत्रों को आजाद कर लिया था। हम हरियाणा के बल्लभगढ़ के राजा नाहर सिंह की बात कर रहे हैं।

राजा नाहर 1857 की स्वंतत्रता क्रांति के प्रमुख सेनानियों में से एक थे। जिनकी वीरता, रणकौशल और शौर्य को अंग्रेज भी लोहा मानते थे। राजा नाहर सिंह भारत के प्रमुख जाट राजाओं में से एक थे।


जब दिल्ली में अंग्रेजों के ख़िलाफ़ राजा नाहर सिंह ने चढ़ाई की

राजा नाहर सिंह ने अपने राज्य से घुड़सवारों की एक सेना तैयार करके दिल्ली पर चढ़ाई कर दी थी, उस समय दिल्ली में अंग्रेजों का शासन था। अंग्रेजों और राजा नाहर सिंह के बीच मे कई बार लड़ाई हुई और हर बार अंग्रेजों को हार का सामना करना पड़ा।

धोखे से पकड़कर फांसी दी थी अंग्रेजों ने

जब अंग्रेजों के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ने के लिए 1857 में मुगलों के शासक बहादुर शाह जफर को दिल्ली की गद्दी पर बैठाया गया, तो उस समय बहादुर शाह जफर की सुरक्षा की जिम्मेदारी राजा नाहर सिंह को सौंपी गई थी।

अंग्रेजों ने अपनी चाल चलते हूए बहादुर शाह जफ़र से संधि की बात की। बहादुर शाह जफर की ओर राजा नाहर सिंह अंग्रेजों ने लाल किले में बुलाया। जैसे ही राजा नाहर सिंह लाल किले में घुसे उसी समय अंग्रेजों ने उनको गिरफ्तार कर लिया था।

हरियाणा के पलवल में सरकारी खजाने को लूटने के आरोप में उन पर अंग्रेजों ने एक झूठा मुकदमा चलाया। यह मुकदमा इलाहाबाद हाईकोर्ट में चलाया गया था। 9 जनवरी 1857 को राजा नाहर सिंह के साथ उनके साथियों को दिल्ली के चांदनी चौक के लालकुआं पर सरेआम फांसी दे दी गई थी।

उसके बाद 9 जनवरी राजा नाहर सिंह के बलिदान दिवस के रूप में भी मनाया जाता हैं। दिल्ली के चांदनी चौक में राजा नाहर सिंह का स्मारक भी बना हुआ है। हर साल 9 जनवरी को उनके बलिदान दिवस पर उनको श्रद्धांजलि दी जाती हैं।





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