राजस्थान के साथ कोरोना में इस तरह सौतेला व्यवहार कर रही हैं मोदी सरकार

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 जयपुर, राजस्थान।





राजस्थान प्रदेश में लगातार कोरोना संक्रमण बढ़ रहा हैं, प्रदेश में एक्टिव कोरोना मरीजों की संख्या 1 लाख से ऊँपर चली गई हैं। प्रदेश के कई अस्पताल मरीजों से हाउसफुल हो गए, वही कई जगहों से ऑक्सीजन और रेमडेसिवर की कमी की खबरें का रही हैं। राजस्थान की गहलोत सरकार केंद्र की मोदी सरकार पर सौतेला व्यवहार को लेकर आरोप लगा रही हैं, वही बीजेपी नेता सीएम गहलोत को ही कोस रहे हैं, लेकिन क्या सही में मोदी सरकार ने राजस्थान के साथ सौतेला व्यवहार किया हैं? आइए जानते हैं।


राजस्थान की जनता ने लोकसभा चुनावों में मोदी सरकार की सभी 25 की 25 की सीट दी, लेकिन फिर भी मोदी सरकार राजस्थान के साथ सौतेला व्यवहार कर रही हैं। उदाहरण के लिए राजस्थान को 205 मेट्रिक टन ऑक्सीजन मिली हैं, वही गुजरात को 975 तो मध्यप्रदेश को 543, उत्तरप्रदेश को 753 मेट्रिक टन मिली हैं, जबकि राजस्थान में एक्टिव मरीजों की संख्या ज्यादा हैं। राजस्थान में प्रति एक्टिव केस 1.64 क्यूबिक मीटर ऑक्सीजन आवंटित हुई हैं, जबकि गुजरात के लिए 8.92 क्यूबिक ऑक्सीजन, तो मध्यप्रदेश के लिए 5.08 क्यूबिक मीटर ऑक्सीजन आवंटित हुई हैं।


वही अगर हम रेमडेसिवर की बात करें तो इसमें भी राजस्थान की जनता राजनीति का शिकार हुई हैं, राजस्थान को 21 अप्रैल को 26500 इंजेक्शन मिले, वही गुजरात को 1 लाख 63000, मध्यप्रदेश को 92 हजार 200 इंजेक्शन मिले हैं, जबकि राजस्थान में एक्टिव केस भी 1 लाख तक पहुंच गए हैं। इस प्रकार केंद्र की मोदी सरकार ने राजस्थान के साथ सौतेला व्यवहार किया है, वही राजस्थान भाजपा प्रोपेगैंडा फैलाकर इस सौतेले व्यवहार को छुपा रही हैं।

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