जयपुर, राजस्थान।
देश मे हुए लोकसभा चुनावों के बाद राजस्थान की सियासित में काफी हलचल देखने को मिल सकती हैं। यह हलचल कांग्रेस में तो घमासान मचा ही रही हैं, लेकिन भाजपा में भी अब देखने को मिलेगी। राजस्थान में अब पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का रॉल धीरे-धीरे खत्म किया जा रहा हैं। हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों में वसुंधरा राजे राजस्थान में प्रमुख नेता के तौर पर नहीं रखा गया था। दूसरी ओर वसुंधरा राजे को राजस्थान से दिल्ली भी ले जाया गया और पार्टी का उपाध्यक्ष बना दिया गया हैं।
विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद वसुंधरा का कद हुआ छोटा
राजस्थान म हुए विधानसभा चुनाव में वसुंधरा राजे का चेहरा सबसे आगे किया गया, लेकिन वसुंधरा राजे की सरकार राजस्थान में गिर गई। क्योंकि राजस्थान की जनता को वसुंधरा राजे से काफी नाराजगी हो गई थी। इसके बाद राजस्थान में हार का कारण वसुंधरा राजे को ही माना गया। अब लोकसभा चुनावों में वसुंधरा राजे को दरकिनार करके दूसरे नेताओं ने चुनाव में प्रमुख भूमिका निभाई और प्रदेश की सभी 25 सीटों पर भाजपा ने बाजी मार ली। इन सीटों पर वसुंधरा राजे का कोई प्रभाव नहीं रहा।
वसुंधरा राजे की बात भाजपा ने टिकट वितरण में भी नहीं मानी थी, लोकसभा चुनावों में वसुंधरा के न चाहते हुए भी कई नेताओं को टिकट दिया गया और वे सभी जीत कर आये। वसुंधरा राजे दौसा से जसकौर मीणा और राजसमंद से दिया कुमारी को टिकट नहीं दिलाना चाहती थी।
वसुंधरा राजे के बाद अब यह नेता होंगे राजस्थान में प्रमुख भाजपा नेता
वसुंधरा राजे के बाद विधानसभा उप नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ राजस्थान में काफी सक्रिय है और लोकसभा चुनावों में भी राठौड़ ने काफी अहम भूमिका निभाई हैं। राजेन्द्र राठौड़ के अलावा जयपुर ग्रामीण सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को राजस्थान में प्रमुख नेता के तौर पर उतारा जा सकता हैं, क्योंकि राज्यवर्धन को इस बार मोदी मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया, इसलिए जरूर भाजपा आलाकमान राज्यवर्धन को राजस्थान में बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकता हैं। सूत्रों के अनुसार राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को राजस्थान भाजपा का प्रदेशाध्यक्ष बनाया जा सकता हैं।

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