चूरू, राजस्थान।
राजस्थान में लोकसभा चुनावों के मतदान होकर उमीदवारों की किस्मत Evm में बंद हो चुकी हैं, अब 23 मई को लोकसभा चुनावों का परिणाम आने पर उनकी किस्मत का पता लग जायेगा। आज हम राजस्थान प्रदेश की चूरू लोकसभा सीट की बात कर रहे हैं। इस सीट पर इस बार माकपा ने अपना उमीदवार उतारकर एक त्रिकोणीय मुकाबला बना दिया हैं। कॉमरेड बलवान पूनियां को माकपा ने चूरू से उतारा था।
भाजपा ने अपने सिटिंग सांसद राहुल कस्वां को फिर टिकट दिया हैं, तो कांग्रेस ने इस बार मुस्लिम कार्ड खेलते हुए रफीक मंडेलिया को मैदान में उतारा हैं। अब इस सीट पर राहुल कस्वां और रफीक मंडेलिया के बीच मुकाबला था, लेकिन बलवान पूनियां के मैदान में उतरने के बाद इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला बन गया हैं।
12 में से 11 बार चूरू से जाट समाज का सांसद बना
चूरू लोकसभा सीट 1977 में बनी थी। इस सीट पर अब तक 12 लोकसभा चुनाव हुए है, जिनमें से 11 बार जाटों ने बाजी मारी हैं। वहीं लगातार पिछले 7 चुनावों से जाट समाज का प्रत्याशी जीतता आ रहा हैं। इस सीट पर कस्वां परिवार का भी काफी वर्चस्व रहा हैं। राहुल कस्वां के पिता रामसिंह कस्वां इस सीट पर 4 बार सांसद रह चुके है, तो राहुल कस्वां भी 2014 में सांसद बने थे।
इस बार इस सीट पर राहुल कस्वां और बलवान पूनियां दोनों ही जाट समाज से है, तो रफीक मंडेलिया मुस्लिम समाज से है, वही करणीसेना के सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की पत्नी शिला शेखावत भी यहाँ से निर्दलीय चुनाव लड़ रही हैं। इस हिसाब से जातिगत समीकरण इस सीट पर देखने को मिल सकते है।
बलवान पूनियां ऐसे पड़ सकते हैं भारी
बलवान पूनियां हनुमानगढ़ की भादरा सीट से विधायक हैं। हनुमानगढ़ जिले की भादरा और नोहर विधानसभा सीट चूरू लोकसभा क्षेत्र में आती हैं। इन दोनों ही सीटों पर कॉमरेड बलवान पूनियां का काफी वर्चस्व हैं। इस कारण इन दोनों सीटों पर भाजपा और कांग्रेस को पूनियां मात दे सकते है।

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