जयपुर, राजस्थान। आज राजस्थान विधानसभा के प्रथम सत्र का आखिरी दिन था। आज मुख्यमंत्री गहलोत ने पहला लेखानुदान भी पेश किया। इसी कड़ी में आज विधानसभा में हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय का मुद्दा भी उठाया गया। इस मामले में पहली बार विधायक निर्वाचित दिव्या मदेरणा ने एक अनुभवी एव मंझे हुए वक्ता के तौर पर आज विधानसभा में राजस्थान सहकारी सोसाइटी (संसोधन) विधेयक, 2019 एवं हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्विद्यालय, विधेयक 2019 पर चर्चा में भाग लेते हुए विपक्ष को करारा जवाब दिया एवं उक्त संसोधन का समर्थन किया।
विधायक दिव्या मदरेणा ने कहा कि पिछली सरकार ने राजशाही नीति अपनाते हुए जनप्रतिनिधियों जैसे मंत्री, विधायक, सांसद, प्रमुख, प्रधान, सरपंच आदि के सहकारी सोसाइटी में चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया था जिसे उक्त संसोधन द्वारा पुनः हटाया गया है ताकि विधानसभा सदस्यों के अनुभव का फायदा सहकारी समितियों को मिल सके।
विधायक दिव्या मदेरणा ने सदन में उक्त बिल पर लम्बी चर्चा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में किसी को चुनाव लड़ने से रोका नही जा सकता है। चुनाव लड़ना संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने प्रतिपक्ष को करारा जवाब देते हुए उन्हें निरुत्तर कर दिया।
इसी प्रकार से 2013 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्विद्यालय खोला था लेकिन बाद में भाजपा सरकार ने बन्द कर दिया। जिसे पुनः खोलने के लिए वर्तमान सरकार बिल लायी है।
उक्त बिल पर मदेरणा ने प्रभावी तरीके से पैरवी करते हुए कहा कि समय की मांग को देखते हुए उच्च शिक्षा के क्षेत्र मे कदम बढ़ाना चाहिए विशेष करके पत्रकारिता के क्षेत्र में। मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है ऐसे में सरकार का यह कदम निर्णायक एवं सराहनीय है।
विधायक दिव्या मदरेणा ने कहा कि पिछली सरकार ने राजशाही नीति अपनाते हुए जनप्रतिनिधियों जैसे मंत्री, विधायक, सांसद, प्रमुख, प्रधान, सरपंच आदि के सहकारी सोसाइटी में चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया था जिसे उक्त संसोधन द्वारा पुनः हटाया गया है ताकि विधानसभा सदस्यों के अनुभव का फायदा सहकारी समितियों को मिल सके।
विधायक दिव्या मदेरणा ने सदन में उक्त बिल पर लम्बी चर्चा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में किसी को चुनाव लड़ने से रोका नही जा सकता है। चुनाव लड़ना संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने प्रतिपक्ष को करारा जवाब देते हुए उन्हें निरुत्तर कर दिया।
इसी प्रकार से 2013 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्विद्यालय खोला था लेकिन बाद में भाजपा सरकार ने बन्द कर दिया। जिसे पुनः खोलने के लिए वर्तमान सरकार बिल लायी है।
उक्त बिल पर मदेरणा ने प्रभावी तरीके से पैरवी करते हुए कहा कि समय की मांग को देखते हुए उच्च शिक्षा के क्षेत्र मे कदम बढ़ाना चाहिए विशेष करके पत्रकारिता के क्षेत्र में। मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है ऐसे में सरकार का यह कदम निर्णायक एवं सराहनीय है।


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