पूर्व विधायक बलजीत यादव को ED ने किया गिरफ्तार, जाने क्या है कारण

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 राजस्थान के राजनीतिक परिदृश्य में एक बार फिर से भ्रष्टाचार और सरकारी कोष के दुरुपयोग को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। सूचना यह है कि पूर्व बहरोड़ विधायक बलजीत यादव को केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने MLA-LAD फंड (स्थानीय क्षेत्र विकास कोष) के कथित गबन और मनी-लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया है। यह मामला राजनीति, प्रशासनिक विश्वसनीयता और वित्तीय पारदर्शिता के लिए गंभीर संकेत देता है और आम जनता के बीच गहरी चर्चा का विषय बन चुका है। 



— बलजीत यादव कौन हैं? —

बलजीत यादव राजस्थान के बहरोड़ विधानसभा क्षेत्र से एक प्रभावशाली राजनेता रहे हैं। वे पहले निर्वाचित विधायक (MLA) रहे हैं और राजनीति में प्रवेश करने से पहले एक खिलाड़ी के रूप में भी लोकप्रियता हासिल कर चुके थे। उनकी पहचान कभी खेल और भ्रष्टाचार विरोधी जन आंदोलन से भी हुई, जिसमें उन्होंने सार्वजनिक रूप से भ्रष्टाचार के खिलाफ 12 घंटे से अधिक दौड़ लगाई थी, जिससे उन्हें जनता के बीच अपनी गंभीर प्रतिबद्धता और जोश के लिए जाना गया। 

राजनीतिक तौर पर उन्होंने अपने क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई और 2018 से 2023 तक विधायक के रूप में जनता का प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न सामाजिक और विकास कार्यों में भाग लिया। 

— MLA-LAD फंड घोटाला: क्या है पूरा मामला? —

MLA-LAD (Local Area Development) फंड एक सरकारी कोष होता है, जिसे विधायकों को अपने निर्वाचन क्षेत्रों में विकासात्मक योजनाओं, सामाजिक कार्यों, बुनियादी सुविधाओं के निर्माण और छात्र-किशोर खेल, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि से संबंधित कार्यों के लिए खर्च करने का प्रावधान होता है।

बलजीत यादव पर आरोप है कि उन्होंने MLA-LAD फंड का दुरुपयोग करते हुए 32 सरकारी स्कूलों के लिए खेले जाने वाले खेल उपकरणों की खरीद में लगभग ₹3.72 करोड़ के घोटाले में सीधा हाथ लगाया। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह धन सीधे उन फर्मों और सहयोगी संगठनों को दिया गया, जिनका संबंध या तो उनके सहयोगियों या परिचितों से था और जिनके माध्यम से भाजपा-एलएडी कोष के पैसे का अनियमित एवं अवैध उपयोग किया गया। 

— कौन-कौन सी आपत्तियाँ सामने आईं? —

जांच एजेंसियों ने पाया है कि:

✔ खेल उपकरणों के खरीद के लिए टेंडर नियमों का उल्लंघन किया गया था।

✔ कई उपकरण मूल्य से अधिक और गुणवत्ता से घटिया थे, जिन्हें स्कूलों में वितरित किया गया।

✔ टेंडर और भुगतान प्रक्रिया में बेईमानी और पारदर्शिता का अभाव रहा।

✔ पैसे का एक बड़ा हिस्सा शासन-प्रशासन से हटकर निजी हितों में डायवर्ट किया गया।

✔ इन्हें करप्शन और धनशोधन के अंतर्गत मनी-लॉन्ड्रिंग के मामलों में दर्ज किया गया। 

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