विधायक बेनीवाल जब लड़ते-लड़ते आसन के सामने गए तो पीछे-पीछे यह 4 विधायक भी बेनीवाल के साथ गए, पढ़े पूरी ख़बर

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जयपुर, राजस्थान। राजस्थान में विधानसभा के तीसरे दिन आज विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ। आज विधानसभा में राज्यपाल कल्याण सिंह का अभिभाषण था। जैसे ही राज्यपाल ने अपना अभिभाषण शुरू किया तो विधायक बेनीवाल खड़े होकर मूंग की सरकारी खरीद का मुद्दा उठाने लग गए। विधायक बेनीवाल बोलते-बोलते आसन के पास चले गए।

बेनीवाल का साथ देने यह 4 विधायक भी पहुंचे आसन पर, जाने कौन थे?

विधायक बेनीवाल लड़ते-लड़ते अपनी सीट खड़े होकर आसन के पास पहुंचे तो उनके पीछे रालोपा के विधायक पुखराज गर्ग और रालोपा की विधायक इंदिरा देवी बावरी भी आ गई। इसके साथ ही माकपा विधायक गिरधारी महिया और माकपा विधायक बलवान पूनियां भी विधायक बेनीवाल का साथ देने पहुँचे। इसका video हम आपको दिखा रहे हैं।


बेनीवाल ने कहा कि मूंग की सरकारी खरीद होनी चाहिए, सरकार को मूंग खरीद के लिए केंद्रों की संख्या बढ़ानी चाहिए। राजस्थान का किसान सड़कों पर घूम रहा हैं, लेकिन सरकार सो रही हैं।

बेनीवाल के इस कदम की निंदा करते हुए नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और राजेंद्र राठौड़ ने बेनिवाल को विधानसभा से बाहर निकालने का प्रस्ताव रखा।

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  1. पिछले दो दिन से राजधानी और विधानसभा में था। आप भी देख रहे हैं और हमने भी नजदीक से देखा कि कैसे प्रदेश की सबसे बड़ी पंचायत में किसानों के नुमाइंदों को बोलने से रोका जा रहा है! उनकी आवाज दबाने में सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस से ज्यादा विपक्षी भाजपा उतावली दिख रही है क्योंकि पिछले 5 साल के इनके काले कारनामे इसी सदन में पड़े हैं, और अगले 5 साल दोनों मिलकर उसे दबाने का कार्य करेंगे।

    सदन चलाना सरकार और विधानसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी है मगर हद तो तब हो गयी जब नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने हनुमान बेनीवाल के सदन से निलंबन का प्रस्ताव रख दिया! यह वही कटारिया है जिनका विधानसभा चुनाव के दौरान का एक ताजा वीडियो वाइरल हुआ है जिसमे वो नफरत फैलाने की बात करते दिखे। शपथ के लिए हनुमान बेनीवाल का नाम पुकारे जाने पर, रालोपा के संघर्ष से अति उत्साहित दर्शक दीर्घा में बैठी प्रदेश की जनता द्वारा तालियां बजाने पर कानून-नियमों का हवाला देने वाले राजेन्द्र राठौड़ मंत्री पद का दुरुपयोग कर फर्जी एनकाउंटर के एक मामले में जेल की हवा खा चुके हैं। इसे कहते हैं ' सौ सौ चूहे खाकर, बिल्ली हज को चली।'

    सभी चाहते हैं सदन सुचारू चले, इस पर प्रति मिनट जनता के टेक्स से जुटाए लाखो रु व्यय होते हैं। परन्तु हम चाहते हैं कि इस सदन में दोनों पार्टियां एक दूसरे की प्रसंशा करने की बजाय यहां गांव, किसान, युवा, बेरोजगार की बात प्राथमिकता से हो। किसानों-युवाओ की बात करने पर यदि रालोपा-कॉमरेड विधायकों को नियमो का हवाला देकर निलंबित किया जाता है तो प्रदेश का युवा-किसान वर्ग 24 घन्टे में पूरे प्रदेश को जाम कर सकता हैं, जिससे निपटना इस कमजोर-लाचार सरकार और मुख्यमंत्री के बस की बात नहीं।

    RLP के कार्यकर्ता, सदन में चल रही कांग्रेस-भाजपा की इस नूरा कुश्ती से जनता को अवगत कराएं कि कैसे दोनों मिलकर 5-5 साल राज करने के दौरान एक दूसरे के घोटालों को छिपाने हेतु हुए गुप्त समझौते के तहत रालोपा-माकपा के 5 विधायको के खिलाफ सदन में इकट्ठे होकर बैठ गए हैं! इन्हें एक्सपोज करें, जनता को भाजपा-कांग्रेस के नाम पर गुमराह कर निरन्तर लूटते रहने की साजिशों को नंगा करे! प्रदेश की आम आवाम तक सोशल मीडिया के मार्फ़त यह संदेश पहुचाएं कि बेरोजगार युवाओं के धरने व किसानों की मूंग खरीद की मांग उठाने वालों के खिलाफ भाजपा-कांग्रेस कैसे एकजुट हो रहे हैं! लोकसभा चुनाव में इन्हें वोट से जवाब अवश्य दें।

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