शीशराम ओला राजस्थान के दिग्गज कांग्रेस नेता थे, उनका निधन 15 दिसम्बर 2013 में हो गया था। आज शीशराम ओला की पुण्यतिथि हैं। शीशराम ओला पद्मश्री से भी सम्मानित थे। शीशराम ओला का नाम राजस्थान के दिग्गजों में शामिल किया जाता हैं। ओला कई बार मंत्री भी रह चुके हैं। साल 2008 में उनका नाम राजस्थान के मुख्यमंत्री के लिए भी सामने आया था। शीशराम ओला के आंत में इंस्पेक्शन होने के कारण उनकी तबियत ज्यादा ख़राब हो गई थी, जिसके चलते उनका देहान्त हो गया था। आज हम इसी दिग्गज के बारे में बात कर रहें हैं।
शीशराम ओला- पद्मश्री
शीशराम ओला का जन्म 30 जुलाई 1927 को झुंझुनूं में हुआ था, ओला ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत विधानसभा चुनाव लड़कर की थी। पहली बार 1957 मे चुनाव लड़ा था। 1957 से लेकर लगातार 1990 तल राजस्थान की विधानसभा में शीशराम ओला सदस्य रहे थे। 10 साल राजस्थान में 1980 से 1990 तक राजस्थान विधानसभा में कैबिनेट मंत्री भी रहे थे।
ओला ने 1996 से 1997 तक रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 1997 से 1998 तक जल संसाधन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में अपनी सेवाएं दीं। वह 23 मई 2004 से 27 नवंबर 2004 तक केंद्र सरकार में श्रम एवं रोजगार मंत्री रहे। उन्होंने मनमोहन सिंह की सरकार में केंद्रीय खनन मंत्री का कार्यभार संभाला।
राजस्थान में दिग्गज जाट नेता के रूप में भी उभरे
राजस्थान में मिर्धा और मदरेणा परिवार के बाद जाट नेताओं में शीशराम ओला का ही नाम आता था। शीशराम ओला को राजस्थान का कदावर जाट नेता भी माना जाता था। शीशराम ओला मुख्यमंत्री की कुर्सी तक भी पहुंच गए थे। 2008 के विधानसभा चुनावों में राजस्थान में जाट मुख्यमंत्री की मांग थी। 2008 में कांग्रेस को 96 सीट मिली थी। उस समय शीशराम ओला और अशोक गहलोत ही मुख्यमंत्री के दावेदार थे। शीशराम ओला ने भी अपना पक्ष रखते हुए जाट मुख्यमंत्री बनाने के लिए कहा था, लेकिन उस समय फिर से सियासी जादूगर अशोक गहलोत ने बाजी मार ली थी।
तीन लड़कियों के साथ मिलकर गांवों की लड़कियों को पढ़ाने के लिए स्कूल खोला था।
शीशराम ओला ने राजनीति में आने से पहले 1952 में 1952 में गांधी बालिका निकेतन अरडावता नाम से तीन लड़कियों के साथ एक स्कूल खोला था। उन्होंने इसके जरिए ग्रामीण राजस्थान के दूर दराज के इलाकों में लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा दिया। इसके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत भी की थी, गांव के लोगों को बालिका शिक्षा के लिए जागरूक बनाया था। उस समय शीशराम ओला का मकसद समाज सेवा ही था, उस समय वो किसी भी राजनीति दल से नहीं जुड़े हुए थे।
शीशराम ओला के बेटे बिजेंद्र ओला अब बढ़ा रहे हैं उनकी राजनीतिक विरासत
5 बार सांसद रह चुके शीशराम ओला के बेटे बिजेंद्र ओला झुंझुनूं जिले से विधायक हैं। इस बार 2018 के चुनाव में भी बिजेन्द्र ओला ने जीत दर्ज की हैं। 2019 में होने वाले चुनावों में बिजेंद्र ओला कांग्रेस से सांसद के लिए भी चुनाव लड़ सकते हैं। शीशराम ओला के 2 बेटे हैं पहले बिजेन्द्र तो दूसरे सरजीत ओला। ओला के एक बेटी भी हैं, जिनका नाम चन्द्रकला हैं।



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