बाड़मेर, राजस्थान। एक ओर जहां राजस्थान में रेतीली मिट्टी हैं और रेगिस्तान ही रेगिस्तान हैं, वहाँ से बर्फीले पहाड़ों का सपना देखना अपने-अपने मे काल्पनिक हैं। लेकिन इस सपने को सच कर दिखाया हैं बाड़मेर की टीपू सारण ने।
पिछले दिनों टीपू सारण ने ग्लेशियर की पहाड़ी पर 16500 फिट ऊंचाई पर इंडिया का झंडा फहराया था।
पिछले दिनों टीपू सारण ने ग्लेशियर की पहाड़ी पर 16500 फिट ऊंचाई पर इंडिया का झंडा फहराया था।
रेगिस्तान से ग्लेशियर का सफ़र
टीपू सारण बाड़मेर के खारियातला भाडखा की रहने वाली हैं। टीपू के पिता केशाराम एक सामान्य किसान हैं। टीपू ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने गांव से ही की थी। उसने बाड़मेर की राजकीय पीजी कॉलेज में स्नातक में एडमिशन लेकर एनसीसी जॉइन कर ली।
एनसीसी जॉइन करने के बाद टीपू ने जैसलमेर में एनसीसी का केम्प किया और उसका सेलेक्शन दार्जलिंग की हिमालय माउंटिंग इंस्टिट्यूट में हो गया। यह एक बेसिक कोर्स था, जो 28 दिन का था। शुरआती ट्रेनिंग में 24 किलोमीटर पैदल चलकर 12 किलो वजन के साथ टाइगर हिल पर चढ़ाई की। पहले ही टेस्ट को टीपू ने समय सीमा से 15 मिनट पहले ही पास कर लिया।
इसके बाद लगातार चढ़ाई का सिलसिला जारी रहा। टीपू ने 13200 फिट पर ज्यूंग्गरी और रिनोक चोटी जो 16500 फिट पर हैं, इन दोनों पर चढ़ाई करके भारत का झंडा लहराया। ऐसा करने वाली टीपू सारण बाड़मेर जिले की पहली बेटी बन चुकी हैं।
अब एवरेस्ट पर जाना है सपना- टीपू सारण
टीपू सारण ने इस फतेह के बाद अब एवेरेस्ट पर जाने का सपना देखा हैं। टीपू इसके लिए अब एडवांस ट्रेनिंग के लिए नेपाल जाएगी। फिर टीपू सारण एवरेस्ट पर फतेह करने की तैयारी करेगी। टीपू सारण राजस्थान की बेटियों के लिए एक प्रेरणा की मिशाल बन चुकी हैं। टीपू कहती हैं कि घबराना नहीं हैं, लक्ष्य प्राप्त करके रहना सही मायने में किसी मिल के पत्थर से कम नहीं हैं।



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