किसान अपने हकों की लड़ाई लड़ रहे, लेकिन भारतीय मीडिया किसानों को खालिस्तानी बता रहा

INC News
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 दिल्ली।





इन दिनों भारत का किसान मोदी सरकार द्वारा बनाये गए तीन कानूनों के विरोध में सड़कों पर आ गया है। किसान पिछले 5 दिनों से दिल्ली आ रहे है। इन किसानों में पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, राजस्थान और मध्यप्रदेश के किसान शामिल है। किसान मोदी सरकार द्वारा आनन फानन में बनाये गए क़ानूनों का विरोध कर रहा है, लेकिन मोदी सरकार किसानों के साथ ऐसा बर्ताव कर रही है, जैसे वो किसी दूसरे देश के किसान है।


हरियाणा की खट्टर सरकार ने किसानों पर ऐसी सर्दी में वाटर कैनन से पानी चलवाया, किसानों पर लाठीचार्ज भी करवाया गया। जहां-जहां पर बीजेपी की सरकार थी, वहां किसानों को आंदोलन करने से रोका गया, जबकि आंदोलन करना किसानों का हक है। यहां तक कि मोदी सरकार के इशारे पर दिल्ली पुलिस ने दिल्ली की केजरीवाल सरकार से 8 स्टेडियम को जेल बनाने की परमिशन भी मांग ली, लेकिन दिल्ली में बीजेपी की सरकार नहीं होकर केजरीवाल की सरकार होने के कारण उन्होंने इस परमिशन को देने से मना कर दिया। नहीं तो किसानों को अब तक इस ओपन जेल में भी डाल दिया जाता।


भारतीय मीडिया किसानों को बता रहा 'खालिस्तानी'


हर बार की तरह भारत का मोदी समर्थक मीडिया किसानों एन्टी नेशनल बता रहा है। 2014 के बाद जब भी कोई सरकार के खिलाफ आंदोलन करता है तो मीडिया उसको पाकिस्तानी, नक्सली, खालिस्तानी, एन्टी नेशनल करार देता है। इस बार भी यही देश का पेट भरने वाले अन्नदाता को भारतीय मीडिया ने खालिस्तान बता दिया। वरना मीडिया को किसानों की बात सरकार तक पहुँचानी थी, ताकि सरकार एक्शन में आती, लेकिन इस बार भी किसानों को मीडिया से निराशा ही हाथ लगी।


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