साल 2018 के विधानसभा चुनाव में जीजा से बगावत कर कांग्रेस में शामिल हुए मसानी को कांग्रेस की ओर से विधानसभा चुनाव में टिकट भी मिला था। हालाँकि वो चुनाव जीतने में सफल नहीं हो पाए थे। और परिस्थितियाँ ऐसी बनी कि उन्हें हराने वाले निर्दलीय विधायक प्रदीप जायसवाल कमलनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री बन गए।
लेकिन सूबे में जब कांग्रेस के 24 विधायकों ने पार्टी के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंका तो जायसवाल भी उसमे शामिल हो गए। जिसका इनाम देते हुए शिवराज सरकार ने उन्हें हाल ही में राज्य खनिज निगम का दर्जा देते हुए कैबिनेट मंत्री बना दिया।
मालूम हो कि संजय मसानी के 2018 में कांग्रेस में शामिल होने के बाद पार्टी ने उन्हें वारासिवनी विधानसभा सीट से टिकट दिया था। मगर उनके खिलाफ कांग्रेस नेता प्रदीप जायसवाल ने बगावत कर चुनाव लड़ा और वे निर्दलीय विधायक चुने गए।
बुधवार को कांग्रेस की राज्य इकाई के उपाध्यक्ष बनाने के साथ ही सीएम शिवराज के साले को उपचुनाव प्रचार- प्रसार का प्रादेशिक समन्वयक प्रभारी बनाया है। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस में शामिल होने के समय मसानी ने कहा था कि मप्र को शिवराज सिंह चौहान की जरूरत नहीं, वो बहुत दिन रह लिए। अब अनाथ प्रदेश को नाथ की जरूरत है। कमलनाथ की जरूरत है।
बहरहाल अब देखने वाली बात यह होगी कि मसानी के उपचुनाव में एंट्री से कांग्रेस के लिए उपचुनाव का रास्ता कितना आसान होता है।


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