व्हिप में यह भी कहा है, राजनीतिक दलबदल की यह बुराई राष्ट्रीय चिंता का विषय है। अगर इससे लड़ा नहीं गया तो यह हमारे लोकतंत्र और मूल्यों को कमतर कर देगा। गौरतलब है कि सितंबर, 2019 में बसपा के 6 विधायक लाखन सिंह, जोगेंद्र अवाना, वाजिब अली, दीपचंद खेरिया, राजेंद्र गुढ़ा और संदीप कुमार कांग्रेस में शामिल हो गए थे।
इस मामले में भाजपा विधायक मदन दिलावर ने अदालत में याचिका दायर की है। उन्होंने स्पीकर सीपी जोशी के समक्ष भी इस मामले में याचिका दायर की थी। स्पीकर ने बसपा के छह विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने का प्रार्थना पत्र स्वीकार कर इसकी इजाजत दे दी थी।
पत्र में विधायकों को दसवीं अनुसूची का मतलब भी समझाया है। लिखा है, किसी पार्टी का विधानसभा सदस्य तब अयोग्य हो जाएगा, अगर वह स्वैच्छिक तौर पर अपनी मूल पार्टी की सदस्यता छोड़ देता है, या पार्टी के निर्देश के बावजूद विधायक सदन में वोट से अनुपस्थित रहता है। ऐसे में यह साफ है कि आप सभी विधानसभा के सदस्य बने हुए हैं और आपकी सदस्यता बसपा से जुड़ी है।
विधानसभा सदस्य की सदस्यता उस वक्त नहीं खत्म होगी, जब उसकी मूल पार्टी का किसी दूसरी पार्टी में विलय हो जाता है।


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