जयपुर, राजस्थान।
राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले बनी पार्टी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के लिए अब एक खुश खबरी हैं। अब रालोपा को प्रादेशिक पार्टी यानी क्षेत्रीय दल का दर्जा मिलने वाला हैं। इन लोकसभा चुनाव में रालोपा ने क्षेत्रीय दल की सारी योग्यता पास कर ली हैं। ऐसा होने पर रालोपा का चुनाव चिन्ह आरक्षित हो जाएगा। हर बार की तरह चुनाव चिन्ह नहीं बदलेगा। जब बेनीवाल ने पार्टी बनाई तो चुनाव चिन्ह बोतल मिला, लेकिन लोकसभा चुनाव में टायर हो गया।
क्षेत्रीय दल बनने के लिए पार्टी को यह योग्यता पास करनी होती हैं-
नीचे दी गई योग्यताओं में से पार्टी को एक योग्यता पूरी करनी होती हैं-
1. यदि कोई पार्टी राज्य विधानसभा की कुल सीटों में से कम-से-कम 3% सीट या कम-से-कम 3 सीटें, जो भी ज्यादा हो प्राप्त करती है. या
2. यदि कोई पार्टी लोकसभा के लिए उस राज्य के लिए आवंटित प्रत्येक 25 सीटों या उस संख्या की किसी भिन्न के पीछे कम से कम 1 सीट प्राप्त करती है. या
3. यदि कोई पार्टी लोकसभा या राज्य विधानसभा के चुनाव में कुल वैध मतों में से कम से कम 6% मत प्राप्त करती है और साथ ही कम से कम 1 लोकसभा सीट या 2 विधानसभा सीट जीतती है. या
4. एक अन्य मापदंड के अनुसार यदि कोई पार्टी लोकसभा या राज्य विधानसभा के आम चुनाव में किसी राज्य में एक भी सीट जीतने में विफल रहती है लेकिन वह उस राज्य में डाले गए कुल वैध मतों में से 8% मत प्राप्त करती है, तो उस राज्य में उस पार्टी को क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा दिया जा सकता है।
ऐसे बनेगी रालोपा प्रादेशिक पार्टी, यह हैं आंकड़ा
रालोपा के पास अभी 2 विधायक और 1 लोकसभा सांसद है। ऐसे में रालोपा को अब क्षेत्रीय दल का दर्जा मिल जाएगा। ऐसा होने ले बाद आने वाले चुनावो के लिए रालोपा को अपना चुनाव चिन्ह नहीं बदलना पड़ेगा और उनका चुनाव चिन्ह आरक्षित हो जाएगा। लेकिन हर चुनाव में पार्टी को इन परीक्षाओं से गुजरना पड़ता हैं। नहीं तो वो दर्जा वापस छीन लिया जाता हैं।

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