अब दिल्ली में राजस्थान को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने की लड़ाई लडूंगा- हनुमान बेनीवाल

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जयपुर, राजस्थान

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सयोंजक और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने अब कहा हैं कि वो दिल्ली में राजस्थान प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने की लड़ाई लड़ेंगे और इसके लिए वो सड़कों पर उतरकर आंदोलन भी करने को तैयार हैं। 

बेनीवाल ने कहा कि इसके साथ ही कहा कि अब वो सिर्फ राजस्थान ही नहीं अपितु पूरे भारत को टोल मुक्त करवाकर रहेंगें। बेनीवाल ने कहा कि राजस्थानवासियों की समस्याओं को वो अपने दोनों विधायको से विधानसभा में समय-समय पर उठवाते रहेंगें। बाकी दिल्ली में लोकसभा में खुद बेनीवाल राजस्थान के लोगों की पैरवी करेंगे।

आख़िर क्या होता हैं विशेष राज्य के दर्जे से

किसी राज्य की भौगोलिक, सामाजिक, आर्थिक और संसाधन के लिहाज से उसकी क्या स्थिति है, इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेष राज्य का दर्जा दिया जाता है. विशेष राज्य का दर्जा कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है। केंद्र सरकार अपने विवेक से उपरोक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेष राज्य का दर्जा देती है।

विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त राज्यों को केंद्र सरकार से 90 फीसदी अनुदान मिलता है। इसका मतलब केंद्र सरकार से जो फंडिंग की जाती है, उसमें 90 फीसदी अनुदान के तौर पर मिलती है और बाकी 10 फीसदी रकम बिना किसी ब्याज के मिलती है। जिन राज्यों को विशेष दर्जा प्राप्त नहीं है उन्हें केवल 30 फीसदी राशि अनुदान के रूप में मिलती है। 70 फीसदी रकम उनपर केंद्र का कर्ज होता है।

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