जयपुर ग्रामीण, राजस्थान।
जयपुर ग्रामीण लोकसभा सीट पर राजस्थान में सबसे रोचक मुकाबला है, इस सीट पर ओलम्पियन आमने-सामने हैं। एक ओर भाजपा से कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ हैं, तो दूसरी ओर कांग्रेस से सादुलपुर विधायक कृष्णा पुनिया मैदान में हैं। राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने निशानेबाजी में रजत पदक जीत रखा हैं, तो कृष्णा पूनियां ने डिस्कस थ्रो में गोल्ड मेडल जीत रखा हैं। दोनो ही साफ छवि के नेता है। राठौड़ मोदी सरकार में मंत्री भी रह चुके है, लेकिन राठौड़ के पक्ष में जातीय समीकरण बिल्कुल नहीं हैं, जिसका फायदा कृष्णा को मिल सकता हैं।
इस तरह जातीय समीकरण राठौड़ के विपक्ष में हो गए, जाट-गुर्जर-यादव जातियों का गुस्सा
दरअसल जयपुर ग्रामीण लोकसभा सीट में जयपुर और अलवर की ग्रामीण इलाकों की 8 विधानसभा सीट शामिल है। जयपुर ग्रामीण सीट पर जाट, यादव, राजपूत और गुर्जर जातियां बाहुल्य संख्या में हैं।
विधानसभा चुनावों में गुर्जर समाज ने भाजपा से टिकट की मांग की थी, भाजपा ने टिकट नहीं तो गुर्जर नाराज हो गए और टिकट नहीं देने में राठौड़ का हस्तक्षेप बताया जा रहा हैं, जिसके कारण गुर्जरों में राठौड़ के प्रति काफी रोष हैं।
यादव समाज भी राठौड़ से गुस्सा हैं, क्योंकि विधानसभा चुनाव में शाहपुरा से मनीष यादव की हार में राजपूत समाज का काफी हाथ था, जिसके कारण यादव नाराज है। दूसरी ओर अलवर में राजपूत कांग्रेस के जितेंद्र सिंह का सपोर्ट कर रहे हैं, तो अलवर में यादव भाजपा के बालकनाथ का। ऐसे में राजपूत और गुर्जर आमने-सामने हैं।
जाट समाज किसान परिवार से आई कृष्णा पूनिया के साथ खड़ा नजर आ रहा हैं। वैसे हमेशा से जाट और राजपूत समाज आमने-सामने ही रहे है। इस बार विधानसभा चुनावों में भी जाट ओर गुर्जर एक साथ थे, यादव भी जाट समाज के साथ खड़ा नजर आ रहा हैं। ऐसे में जाट समाज कृष्णा पूनियां के पक्ष में नजर आ रहा हैं। जाट वोटर्स को लुभाने के लिए राठौड़ ने रालोपा नेता बेनीवाल से फुलेरा में रैली भी करवाई थी।
हालांकि अंतिम परिणाम जनता के हाथ मे हैं और जनता के मूड ले बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता हैं। सही परिणाम 23 मई को ही पता चलेगा। लेकिन राठौड़ को इन जातियों के कारण चिंता जरूर सता रही हैं।

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