नागौर, राजस्थान। यह कहानी एक शख्स की जिसने पूरा जीवन समाज सेवा में लगा दिया। यह कहानी हैं ऐसे दानवीर की जिसने अपनी सारी संपत्ति स्कूलों के नाम कर दी। यह कहानी हैं ऐसे शख्स की जिसने अब तक 4 करोड़ रुपये से ज्यादा छात्रों को उपहार के तौर पर प्रोत्साहित करने के लिए दे दिए। हम आज बात कर रहे है नागौर जिले की जायल तहसील के रहने वाले पूर्णाराम गोदारा की, जो जगत मामा के नाम से मशहूर हैं। आप यह कहानी पढ़ने के बाद सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि आज इस चकाचौंध भरी जिंदगी में कोई आदमी ऐसा भी हैं।


आखिर कौन हैं यह जगत मामा?
आज मोह-माया से भरी इस दुनियां में एक ऐसा शख्स भी हैं, जो मोह-माया त्याग अपना जीवन छात्रों के नाम कर रहा हैं। जगत मामा राजस्थान के नागौर जिले की जायल तहसील के रहने वाले 85 वर्षीय पूर्णाराम गोदारा हैं। पूर्णाराम गोदारा सुबह होते ही घर से निकल पड़ते हैं और किसी भी स्कूल में पहुंच जाते हैं। स्कूल में बच्चों के बीच किसी ऐसे चेहरे को ढूंढने लग जाते हैं, जो आगे जाकर कुछ बन सके। फिर उन्हें अपनी मर्जी से नकद इनाम देते हैं। किसी भी स्कूल में कोई होनहार छात्र दिखाई देता हैं, तो उसको जगत मामा अपनी जेब से नकद ईनाम देते हैं।
जिस किसी स्कूल में खेल-कूद प्रतियोगिता होती रहती हैं, तो वहाँ पर भी जगत मामा इनाम देने पहुंच जाते हैं और सभी बच्चों के लिए हलवा-पूरी भी बनवा देते हैं। इस तरह1 जगत मामा ने अब तक ईनाम के रूप में 4 करोड़ से ज्यादा रुपए बांट दिए है।
स्कूल में प्रवेश से लेकर सारा खर्च जगत मामा उठाते हैं
आस-पास की सभी स्कूलों में जगत मामा छात्रों की प्रवेश से लेकर उनकी किताबे, उनके बैग सहित सारा खर्च उठाते हैं। जिस स्कूल में जगत मामा चले जाते हैं, उसकी काया पलट हो जाती हैं। सुबह घर से निकले जगत मामा कही पर ही रात गुजार लेते हैं। अपनी 300 बिगा जमीन भी जगत मामा ने स्कूलों, ट्रस्ट और गौशाला के नाम कर दी हैं।
जगत मामा ने इस समाज सेवा के चलते शादी भी नहीं की हैं। पूर्णाराम गोदारा बच्चों को 'भानिया' कहते हैं, इसलिए सारे बच्चे उनको मामा ही कहते हैं। इसलिए उनका नाम जगत मामा पड़ गया।



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