सीकर, राजस्थान। लक्ष्मणगढ़ से विधायक गोविंद सिंह डोटासरा अब राजस्थान के नए शिक्षा मंत्री बन गए हैं। डोटासरा ने सोमवार को राजस्थान के मंत्री के तौर पर शपथ ली थी और आज रात उनको शिक्षा मंत्रालय दिया गया हैं, इसके साथ ही उनको पर्यटन और देवस्थान विभाग भी दिया गया हैं। डोटासरा तीसरी बार विधायक बने हैं। पिछली बार मोदी लहर में भी इन्होंने जीत हांसिल की थी। डोटासरा एक सामान्य किसान परिवार में जन्म लेकर इतने बड़े पद तक पहुँचे हैं। आइए जानते हैं, इनके संघर्ष की कहानी।
किसान से शिक्षा मंत्री बनने की कहानी
गोविंद सिंह डोटासरा का जन्म 1 अक्टूबर 1964 में सीकर जिले की लक्ष्मणगढ़ की एक छोटी सी ढाणी में हुआ था, उस ढाणी का नाम कृपाराम जी की ढाणी हैं। डोटासरा ने जाट जाति में जन्म लिया था और यह जाति शुरू से किसान कोम कहलाती हैं। डोटासरा के पिता मोहन सिंह एक सरकारी अध्यापक थे।
डोटासरा ने शुरआती पढ़ाई अपने क्षेत्र में की। उच्च शिक्षा के लिए डोटासरा ने राजस्थान विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया और वहाँ से इन्होंने बीकॉम की पढ़ाई पूरी की और उसके बाद वकालत की पढ़ाई करते हुए एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई पूरी करने के बाद डोटासरा ने वकील का काम किया और लगभग 20 सालों तक डोटासरा सीकर में एक वकील का काम करते रहें।
इस बीच गोविंद सिंह डोटासरा ने साल 1984 में सुनीता देवी से शादी की। इनकी पत्नी सुनीता देवी भी एक सरकारी अध्यापिका हैं। डोटासरा दम्पति के दो बेटे हैं।
वकालत करते-करते बन गए नेता
सीकर में वकालत करते-करते गोविंद सिंह डोटासरा ने राजनीति में भी भाग लेना शुरू कर दिया था। शुरुआती दौर में डोटासरा एनएसयूआई में कार्यरत थे। उसके बाद युवा कांग्रेस के सदस्य बन गए थे। साल 2005 में डोटासरा ने कांग्रेस से टिकट लेकर पंचायत समिति का चुनाव लड़ा था और अपना पहला ही चुनाव गोविंद सिंह डोटासरा जीत गए थे।
डोटासरा दिलचस्प तरीक़े से बने थे प्रधान
दरअसल पंचायत समिति के चुनाव जीतने के बाद लक्ष्मणगढ़ के प्रधान को चुनना था, लेकिन इन चुनावों में कांग्रेस के लगभग सारे सदस्य हार गए थे, तो मजबूरी में गोविंद सिंह डोटासरा को लक्ष्मणगढ़ का प्रधान बनाना पड़ा था। लक्ष्मणगढ़ का प्रधान बनने के बाद गोविंद सिंह डोटासरा ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा।
डोटासरा राजस्थान कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नारायण सिंह चौधरी को अपना गुरु मानते थे। इसके बाद डोटासरा ने राजनीति में नई-नई उपलब्धियों को हांसिल किया। 7 साल तक डोटासरा सीकर जिले के कांग्रेस अध्यक्ष भी रहे थे। इसके बाद 2008 में डोटासरा ने कांग्रेस की टिकट पर लक्ष्मणगढ़ विधानसभा से विधायक का चुनाव लड़ा था और डोटासरा पहली बार विधायक बन गए।
34 वोट से विधायक बनने वाला आज राजस्थान का शिक्षा मंत्री बना
डोटासरा ने अपना पहला विधायक का चुनाव सिर्फ 34 वोट से जीता था। यह एक सबसे बड़ी बात थी। डोटासरा के काम को देखते हुए अगले चुनाव 2013 में मोदी लहर में भी डोटासरा ने राजस्थान विधानसभा का चुनाव फिर से जीत लिया था। इस बार कांग्रेस का सुफड़ा साफ हो गया था। डोटासरा को कांग्रेस ने विधानसभा का सचेतक बना दिया। इन 5 सालों में डोटासरा ने सत्ता में बैठी सरकार वसुंधरा सरकार को बहुत बार घेरने का काम किया और सभी की नज़र में डोटासरा एक बड़े कद के नेता बन गए।
साल 2016 में सर्वश्रेष्ठ विधायक से सम्मानित हुए डोटासरा
डोटासरा को साल 2016 में सर्वश्रेष्ठ विधायक का सम्मान भी मिला था, जबकि वो विपक्ष में थे। डोटासरा ने किसानों के लिए प्याज के समर्थन मूल्य के लिए वसुंधरा सरकार को बहुत बार घेरा था। इस बार साल 2018 में हुए विधानसभा चुनावों में डोटासरा में लगातार तीसरी बार विधानसभा चुनाव जीता हैं। इस बार डोटासरा राजस्थान के राज्य मंत्री बनाए गए है और उनको राजस्थान का शिक्षा मंत्री बनाया गया हैं।



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