जयपुर स्थित प्रतिष्ठित नीरजा मोदी स्कूल (Neerja Modi School) के खिलाफ केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कड़ा एक्शन लिया है। बोर्ड ने स्कूल की मान्यता रद्द कर दी है, यह कदम उस गंभीर मामले के बाद उठाया गया है जिसमें एक नौ वर्ष की बालिका के आत्महत्या से जुड़ी संदिग्ध परिस्थितियों ने शिक्षा व्यवस्था में बच्चे की सुरक्षा और स्कूल प्रशासन की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह मामला केवल एक स्कूल के विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में छात्र सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और शैक्षणिक संस्थानों के मानकों को लेकर व्यापक बहस और चिंताओं को जन्म दे रहा है।
क्या हुआ: मामला, बच्चे की मौत और प्रारंभिक जांच
मामला लगभग एक महीना पहले का है जब नीरजा मोदी स्कूल में कक्षा चार की छात्रा अमायरा (नौ वर्ष) कथित रूप से स्कूल की चौथी मंज़िल से गिरी और उसकी मौत हो गई। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, बच्चे ने आत्महत्या की, जिससे परिवार, अन्य अभिभावक और स्थानीय समुदाय में गहरा शोक और गुस्सा फैला। प्रथम दृष्टया यह कोई सामान्य दुर्घटना नहीं थी, बल्कि स्कूल प्रशासन की कथित लापरवाही को उजागर करने वाला मामला बन गया।
इसके बाद शिक्षा विभाग और सीबीएसई दोनों ने मामले की जांच शुरू की, जिसमें पाया गया कि स्कूल में कई गंभीर सुरक्षा खामियां, निगरानी की कमी और बच्चों का बार-बार उत्पीड़न के बारे में शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। �
Shiksha
CBSE के जांच में क्या सामने आया
CBSE की जांच टीम ने स्कूल के संचालन और सुरक्षा प्रोटोकॉल की छानबीन की। जांच में ये कई अहम निष्कर्ष सामने आए:
1. सुरक्षा मानकों का उल्लंघन
CBSE के अनुसार, स्कूल प्रांगण में कई जगह सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था।
🔹 चौथी मंज़िल पर सुरक्षा नेट नहीं थे,
🔹 सीढ़ियों और बालकनियों पर सुरक्षा उपाय कमज़ोर थे,
🔹 स्टाफ की निगरानी और सीसीटीवी कैमरों की प्रभावी मॉनिटरिंग नहीं थी।
🔹 कुछ मामलों में सीसीटीवी फुटेज ठीक से उपलब्ध नहीं थी या सीमित अवधि का ही रिकॉर्ड पाया गया। �
Shiksha
इन सभी कमियों ने न सिर्फ सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किया, बल्कि यह भी सिद्ध किया कि छात्र-सुरक्षा व्यवस्था में पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
2. बुलिंग (उत्पीड़न) की शिकायतों को नज़रअंदाज़ करना
जांच में यह भी सामने आया कि अमायरा को स्कूल में लगातार उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था।
🔹 लगभग 1.5 वर्ष तक होने वाले बुलिंग के अनेक मामले दर्ज थे,
🔹 छात्रा ने कई बार सहायता के लिए शिक्षकों से संपर्क करने की कोशिश की,
🔹 पर स्कूल प्रशासन या शिक्षकों द्वारा कोई गंभीर या प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
CBSE के अनुसार अमायरा ने शिक्षक से मदद की पाँच बार कोशिश की, लेकिन उचित समर्थन नहीं मिला। ऐसे कई उदाहरण मिले जहां उक्त बुलिंग की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। �


Tnxx for comment