समाज की आटा-साटा प्रथा से परेशान होकर इस लड़की ने दे दी जान, लेकिन समाज से कर गई ऐसी विनती

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 नागौर, राजस्थान।


सोमवार को नागौर जिले में एक 21 वर्षीय युवती ने सुसाइड किया हैं, युवती के सुसाइड की वजह समाज में व्याप्त "आटा-साटा या अदला-बदली" नाम की प्रथा हैं। दरअसल युवती का नाम सुमन चौधरी था, जो नागौर जिले की नावां तहसील की हेमपुरा गांव की रहने वाली थी। युवती ने कुएं में कूद कर अपनी जान दे दी, लेकिन जाते जाते युवती ने सुसाइड नोट के जरिये समाज को बड़ा संदेश दिया और इस प्रथा को जड़ से खत्म करने की अपील भी की।





सुसाइड नोट में युवती ने लिखी यह बातें


सुमन चौधरी ने अपना नाम बताते हुए कहा कि मैं सुसाइड सिर्फ इस आटा-साटा प्रथा की वजह से कर रही हूं, इसका दोष मेरे माता-पिता को नहीं हैं, बल्कि समाज को दोष हैं, जो समाज ने ऐसी प्रथा शुरू की, समाज ने अपने स्वार्थ के लिए यह प्रथा शुरू की, पढ़ी लिखी लड़कियों की आज यह प्रथा जिंदगी खराब कर रही हैं, हजारों लड़कियों की शादी अपने से कई साल बड़े लड़को से इस प्रथा के कारण हो जाती हैं। 








सुमन चौधरी ने कहा कि मेरे मरने के बाद कोई भी व्यक्ति मेरे माता-पिता पर अंगुली नहीं उठाए, अगर उठाना ही हैं तो समाज पर उठाए, जिसने ऐसी प्रथा शुरू की। सुमन ने लिखा कि आज बेटी का जन्म होते ही यह सोच लिया जाता हैं कि इसकी शादी किसके बदले की जाएगी। इस सोच की वजह से आज हजारों लड़कियों की जिंदगी बर्बाद हो गई हैं और हो रही हैं। सुमन ने लिखा कि इस प्रथा को जड़ से खत्म करना चाहिए। सुमन ने कहा कि सभी भाइयों से विनती की कि कोई भी भाई अपनी बहन के बदले में शादी न करें।

सुमन ने सुसाइड नोट में लिखा कि मेरे चिता को अग्नि सिर्फ मेरा भाई देगा, मेरे पति से अग्नि न दिलाए। सभी बड़े लोगों और समाज को लोगों को समझाए और सभी स्टेटस लगाए। अगर मेरी वजह से 10 लड़कियों की जिंदगी भी बच जाती हैं, तो मेरा मरना ही सही।


पढ़ाई में काफी होशियार थी सुमन, आटा-साटा में शादी हो गई

जानकारी के अनुसार सुमन चौधरी पढ़ाई में काफी होशियार थी, लेकिन इस तरह शादी होने के बाद वो परेशान थी, जिसकी वजह से उसने सुसाइड जैसा कदम उठाया। सुमन के चाचा ने रिपोर्ट दर्ज करवाकर बताया कि सुमन पिछले कई महीनों से मायके ही थी, उसका पति विदेश रहता हैं, वो पिछले 5-6 दिनों से मानसिक तनाव में थी, जिसके चलते सुमन ने सुसाइड किया।


आखिर कब लगेगी इस प्रथा पर रोक

साथियों में भी इस जिले का रहने वाला हूँ और मैंने भी इस प्रथा को बहुत करीब से देखा हैं। आजकल इस तरह से काफी शादियां हो रही हैं और सबसे ज्यादा जाट समाज में। लड़के पढ़ाई नहीं करते और काम-धंधा नहीं करने के कारण उनकी शादी नहीं हो पाती तो अपने स्वार्थ के कारण उनकी शादी अपनी बहन के बदले कर दी जाती हैं, इसमें बहन से उसकी पसंद भी नहीं पूछी जाती। अपने स्वार्थ के कारण उसकी जिंदगी बर्बाद की जाती हैं।


इस तरह की शादियों में किसी 17 साल की लड़की की शादी 25 साल के लड़के ले साथ होती हैं, लड़का-लड़की में दिन-रात का फर्क होता हैं, फिर भी शादी कर दी जाती हैं। ऐसी शादियां काफी दिनों तक चल भी नहीं पाती। अगर एक शादी टूट जाती हैं तो बाकी शादियां भी उस एक की वजह से टूट जाती हैं। समाज को मिलकर इस प्रथा को खत्म करना चाहिए। युवाओं को इस प्रथा को खत्म करने के लिए सबसे आगे आना होगा।



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