जाने कैसे एक सरकारी मास्टर से कैबिनेट मंत्री तक पहुंचे मास्टर भंवरलाल लाल मेघवाल? देखें पूरी स्टोरी

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 जयपुर, राजस्थान।





सोमवार को राजस्थान सरकार के सहकारिता और सामाजिक न्याय मंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल का निधन हो गया है। मास्टर भंवरलाल मेघवाल काफी दिनों से ब्रेन हेमरेज की बीमारी से जूझ रहे थे। मई में वो बीमार हुए थे, पहले उनका इलाज जयपुर में फिर गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में चल रहा था, जहां सोमवार शाम को उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। 72 साल के मास्टर भंवरलाल मेघवाल का राजनीतिक जीवन भी काफी उतार चढ़ाव वाला था, वो कोई राजनीतिक पृष्टभूमि से नही थे, न कोई पारिवारिक राजनीति से। एक सामान्य से घर मे जन्म लेकर मास्टर बनने वाले भंवरलाल ने राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री तक का सफर तय किया था। आइए उनके पूरे जीवन के बारे में जानते है-


प्रारंभिक जीवन- 


मास्टर भंवरलाल मेघवाल का जन्म 19 नवम्बर 1947 को राजस्थान के चूरू जिले की सुजानगढ़ तहसील के गांव बाघसरा में हुआ था। उनके पिता का नाम चुन्नीराम और माता का नाम रुक्मिणी देवजी था। उनकी प्रारम्भिक शिक्षा गांव खींचिवाल में हुई थी। हायर सेकंडरी तक पढ़ने के बाद वो 1968 में शिक्षक बन गए, उसके बाद उन्होंने एसटीसी की। 1970 से लेकर 1977 तक उन्होंने सुजानगढ़ के नया बास की राजकीय झंवर स्कूल में अध्यापन कार्य किया। इस दौरान उनको लोग मास्टर जी कहकर ही पुकारते थे, तब से यह नाम उनके साथ जुड़ गया, जो आगे राजनीति में भी साथ जुड़ा रहा। स्कूल में वो खेल खुद में काफी रुचि व।रखते थे, बच्चों के बीच वो एक पीटीआई भी थे, ज्यादातर भंवरलाल मेघवाल इंग्लिश ही पढ़ाते थे। उस समय भी उनकी रुचि राजनीति में काफी थी, राजनीति से जुड़ा कार्य भी वो करते थे।


शादी से पहले 1965 में उनकी शादी फतेहपुर के सेडूराम चौहान की बेटी केशर देवी से हुई। मेघवाल के एक पुत्र और दो पुत्रियां है। हाल ही में 18 दिन पहले मेघवाल की एक पुत्री का अस्थमा से निधन हुआ है, वो पूर्व जिला प्रमुख थी। इस तरह इस परिवार पर एक साथ 2 बार दुःखों का पहाड़ टूटा है। वही हाल ही में 11 नवम्बर को उनकी पत्नी केशर देवी ने निर्विरोध पंचायत चुनाव जीता है। पहली बार उनके बेटे मनोज मेघवाल भी राजनीति में उतरे है, इन दिनों वो पंचायत चुनाव के लिए प्रचार कर रहे थे।


राजनीतिक जीवन-


1977 में जब वो सुजानगढ़ में टीचर थे, उस दौरान उनके पास कांग्रेस की टिकट का ऑफर आया था, लेकिन उन्होंने पहले मना किया और कहा कि मेरी नौकरी छूट जाएगी, लेकिन बाद में भंवरलाल मेघवाल चुनाव लड़ने के लिए राजी हो गए और पहली बार चुनाव लड़े, लेकिन इस चुनाव में उनको हार मिली। चुनाव से पहले उनको नौकरी से इस्तीफा देना पड़ा था। 1980 में हुए चुनावों में उनको कांग्रेस से टिकट नहीं मिला, इसलिए मास्टर भंवरलाल मेघवाल ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और चुनाव जीत गए, 5 साल विधायक रहे, उसके बाद 1985 फिर कांग्रेस से चुनाव लड़ा और चुनाव हार गए। 


फिर 1990 में चुनाव लड़ा और दूसरी बार जीतकर राजस्थान विधानसभा पहुंचे, उसके बाद फिर 1993 में चुनाव हुए, उनमें उनको फिर से हार मिली। 1995 में सुजानगढ़ पंचायत समिति से चुनाव जीतकर प्रधान बन गए। उसके बाद 1998 के विधानसभा चुनावों में भंवरलाल मेघवाल ने चुनाव जीता और पहली बार उनको राज्य मंत्री बनाया गया। 2003 के विधानसभा चुनाव में इनको फिर से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 2008 के विधानसभा चुनावों में इन्होंने फिर से बाजी मार ली और राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री बने, उन्होंने राजस्थान का शिक्षा मंत्री बनाया गया।





लेकिन विवाद के चलते 3 साल बाद उनको मंत्री पद से हटा दिया गया। 2013 के विधानसभा चुनावों में मास्टर भंवरलाल मेघवाल को हार मिली। उसके बाद 2014 के लोकसभा चुनावों में भंवरलाल मेघवाल को गंगानगर लोकसभा सीट से मैदान में उतारा, लेकिन मोदी लहर के चलते उन्हें फिर से हार का सामना करना पड़ा। 2018 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने रिकॉर्ड जीत दर्ज की, चूरू में जिले में सबसे ज्यादा वोटों से जितने वाले विधायक बने, फिर उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया और सामाजिक न्याय मंत्री बनाया गया, लेकिन 16 नवम्बर को मास्टर भंवरलाल मेघवाल का निधन हो गया।


उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सीएम गहलोत, सचिन पायलट सहित तमाम नेताओ ने शोक व्यक्त किया। राजस्थान में एक दिन का राजकीय अवकाश भी घोषित किया गया। कई नेताओं ने मेघवाल के निधन को एक बड़ी क्षति भी बताया। मेघवाल राजस्थान के बड़े दलित नेताओ में आते थे, प्रदेश की राजनीति में दलित समाज पर उनका काफी प्रभाव था। इसके अलावा मास्टर भंवरलाल मेघवाल एक दबंग नेता के रूप में भी जाने जाते थे।




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