जयपुर, राजस्थान।
प्रदेश में 1 नवंबर को गुर्जर आंदोलन की चेतावनी को देखते हुए गहलोत सरकार ने बड़ा फैसला लिया है, आंदोलन से निपटने के लिए गृह विभाग ने गुर्जर बाहुल्य भरतपुर, धौलपुर, सवाई माधोपुर, दौसा, टोंक, बूंदी, झालावाड़ और करौली में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगा दिया है। इसके अलावा प्रशासन ने इन जिलों में इंटरनेट सेवा भी बन्द कर दी हैं।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अप्रूवल के बाद गृह विभाग ने इसके आदेश जारी किए। गृह विभाग ने इन 8 जिलों के कलेक्टर्स को रासुका का प्रयोग करने के लिए अधिकार दिए हैं। गुर्जर नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने अति पिछड़ा वर्ग (मोस्ट बैकवर्ड क्लास यानी एमबीसी वर्ग) के पांच फीसदी आरक्षण सहित अन्य मांगों को लेकर एक नवंबर को फिर से आंदोलन की राह पकड़ने का एलान किया है।
आखिर रासुका क्या होती? जाने
दरअसल रासुका एक कानून हैं, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून कहा जाता हैं, इसे शॉर्ट में NSA भी कहा जाता हैं। इस कानून का आदेश राज्य सरकार या फिर केंद्र सरकार देती हैं, जब सरकार को लगे कि कोई समूह इस तरह की गतिविधि करता हैं, जिससे राष्ट्र की सुरक्षा, देश के आम नागरिक सुरक्षा को खतरा हो, ऐसे में इस कानून को तोड़ने वाले को तुरंत गिरफ्तार करने का आदेश होता हैं, इसके तहत 1 साल की सजा का भी प्रावधान हैं।
शुक्रवार को महज चार मिनट की प्रेसवार्ता में कर्नल बैंसला ने दो-टूक कहा कि अब कोई वार्ता नहीं, आंदोलन होगा। 17 अक्टूबर को गांव अड्डा में हुई गुर्जर समाज की महापंचायत में राज्य सरकार को मांगों के लिए 15 दिन का समय दिया था, लेकिन सरकार ने मांगों को अनदेखा कर सकारात्मक पहल नहीं की। एक भी मांग नहीं मानी है। ऐसे में एमबीसी समाज में कड़ा आक्रोश है।

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