गौरतलब है कि राजस्थान में सीएम गहलोत बहुमत साबित करने को लेकर बार-बार राज्यपाल से विधानसभा सत्र बुलाने की बात कहते रहे और हर बार अपने पास 109 विधायक होने का दावा करते रहे है। लेकिन आपको बता दें कि केवल सिर्फ 92 विधायक ही जयपुर से जैसलमेर पहुंचे हैं। इनमें चार मंत्री समेत 7 विधायक जयपुर में ही हैं और इन्हें लेकर कांग्रेस के पास 99 विधायक होते हैं जो उनके दावे से 10 कम हैं।
बता दें कि राजस्थान में 200 विधायक है। विधानसभा में 101 विधायकों के समर्थन की जरूरत है। गहलोत को बहुमत साबित करने के लिए सीपीएम के विधायक बलवान पूनिया ने कुछ समय पहले साथ देने का भरोसा दिलाया था, लेकिन अब बलवान पूनिया न जयपुर में बाड़ेबंदी में थे ना ही जैसलमेर गए। पूनिया ने अगर पार्टी व्हिप का पालन किया और कांग्रेस के पक्ष में मत नहीं दिया तो गहलोत सरकार के पास विधायक 99 ही रहेंगे। कुल मिलाकर गहलोत सरकार के गिरने का खतरा बरकरार है।
वहीं, एक मंत्री मास्टर भंवरलाल इतने बीमार हैं कि विधानसभा में मतदान नहीं कर सकते हैं। फिलहाल उनका मत किसी कैंप में नहीं है। स्पीकर सीपी जोशी सिर्फ पक्ष-विपक्ष की समान मत संख्या पर ही मतदान करा सकते हैं। अगर गहलोत के पास 99 मत ही रहते हैं तो सीपी जोशी मतदान नहीं कर पाएंगे यानी सरकार नहीं बचा सकते। जोशी सरकार को तभी बचा सकते हैं जब गहलोत 100 विधायक जुटा लें । ऐसा तभी संभव है जब सीपीएम के दो में से कम से एक गहलोत के पक्ष में वोट करें।
गौरतलब है कि राजस्थान में सियासी संग्राम जारी है। कांग्रेस अभी दो धड़ों में विभाजित है, एक खेमा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का है और दूसरा खेमा पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट का है। पायलट खेमा अभी हरियाणा में किसी अज्ञात होटल में रह रहे है तो दूसरी और गहलोत खेमा जैसलमेर के सूर्यागढ़ होटल में रुके हुए है।


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