राजस्थान में सियासी घमासान रुकने का नाम नहीं ले रहा है, इस घटनाक्रम में हर दिन नई-नई घटनाएं सामने आ रही है। गुरुवार को मुख्यमंत्री गहलोत ने राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात करके राजस्थान विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की थी। लेकिन कल शुक्रवार सुबह राज्यपाल कलराज मिश्र ने विधानसभा के सत्र को लेकर अनुमति नहीं दी और कोरोना का हवाला दे दिया। राज्यपाल के इस कदम के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपने विधायकों के साथ राजभवन पहुंच गए। राजभवन में विधायकों ने राज्यपाल निवास के सामने धरना दे दिया।
राष्ट्रपति शासन लगने से बचा
धरने पर बैठे विधायकों ने नारेबाजी भी करना शुरू कर दिया, जिसके कारण राज्यपाल कलराज मिश्र काफी नाराज हो गए और यह बात आगे दिल्ली तक भी पहुंच गई। इस बीच मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि अगर राजभवन को कोई जवाब नहीं देता है, तो राजस्थान की जनता राजभवन का घेराव कर सकती है। सीएम के बयान के बाद स्थिति काफी गम्भीर हो गई। इसकी चर्चा दिल्ली और राजभवन के अंदर होने लग गई। सूत्रों के अनुसार बताया जा रहा था कि इस स्थिति में राजभवन की सुरक्षा CRPF को देने की तैयारी होने लगी, अगर ऐसा होता तो राजस्थान में राष्ट्रपति शासन लागू हो जाता।
लेकिन ऐनवक्त पर मुख्यमंत्री गहलोत को कांग्रेस आलाकमान से तुरंत सन्देश मिला और कहा गया कि जल्द राजभवन से धरना हटाओ और देखते ही देखते सीएम गहलोत ने राजभवन से धरना उठा दिया। लेकिन इस घटना के कारण राज्यपाल कलराज मिश्र खासा नाराज नजर आए, हो सकता है यह घटना आने वाले दिनों में भी राज्यपाल याद रखे। इसके परिणाम आने वाले दिनों में देखे जा सकते है।

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