अगर सीएम अशोक गहलोत औऱ डिप्टी सीएम सचिन पायलट की आपसी खींचतान से राजस्थान में सरकार गंवाने के करीब पहुंच चुकी थी, तो विरोधी खेमे में वसुंधरा राजे के निहित स्वार्थों ने अशोक गहलोत का तख्तापलट रोक बीजेपी की सरकार नहीं बनने दी। कम से कम वसुंधरा राजे के एक करीबी कैलाश मेघवाल ने बीजेपी नेतृत्व को जो नसीहत दी है, उससे साफ हो जाता है कि अशोक गहलोत सरकार को बचाने में वसुंधरा राजे का बड़ा हाथ रहा है। देखा जाए तो इस तरह वसुंधरा राजे के करीबी विधायक कैलाश मेघवाल ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
'वसुंधरा राजे से राय लेते'
एक निजी चैनल से बातचीत में कैलाश मेघवाल ने दो टूक कहा कि किसी भी फैसले में वसुंधरा राजे की राय लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजस्थान में राजे की अनदेखी नहीं की जा सकती। बीजेपी विधायक मेघवाल ने कहा कि बीजेपी चाल चरित्र नैतिकता वाली पार्टी है। ऐसे में हॉर्स ट्रेडिंग के जरिए सरकार गिराने की हो रही साजिश को मैं सही नहीं मानता हूं। उन्होंने कहा कि राजस्थान की राजनीति आज पटरी से उतरी हुई है इसकी वजह से जनता को बहुत परेशान होना पड़ रहा है। जनसंघ से लेकर बीजेपी तक के सफर में नेताओं ने यही आदर्श रखा कि नैतिक मूल्यों की राजनीति होनी चाहिए आज की राजनीति जैसी हो रही है वह अनैतिक है।
'सरकार गिराने का षड्यंत्र दुर्भाग्यपूर्ण'
बताते हैं कि कैलाश मेघवाल ने पार्टी नेतृत्व को एक पत्र भी लिखा है। इसमें कहा गया है कि जिस प्रकार का माहौल सरकार गिराने को लेकर पिछले दो महीने से बना हुआ है, हॉर्स ट्रेडिंग हो रही है, आरोप-प्रत्यारोप लग रहे हैं, वह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। मेघवाल ने आगे लिखा, राजस्थान में आजादी के बाद सरकारें कई बार बदलीं विधानसभा के अंदर भी पक्ष-विपक्ष के बीच जमकर बहस भी हुईं। स्वर्गीय मोहनलाल सुखाडिया, स्व. भैरो सिंह शेखावत से लेकर अशोक गहलोत हों या वसुंधरा राजे, इन सभी के समय बहस हुई हैं। परंतु सत्ताधारी पार्टियों ने विपक्षी पार्टियों से मिलकर सरकार गिराने के षडयंत्र जो आज हो रहे हैं, ऐसा कभी नहीं हुआ।


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