केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत। राजस्थान में जो बवाल हो रहा है अशोक गहलोत की सरकार को लेकर, उसमें शेखावत जी का नाम लिया जा रहा है बहुत दिन से। आरोप है कि गहलोत कैम्प के विधायकों को ख़रीदकर अपने साइड मिलाने की कोशिश कर रहे हैं। कल 22 जुलाई को इसी बात का ज़िक्र करते हुए सीएम अशोक गहलोत ने नरेंद्र मोदी को चिट्ठी भी लिखी।
और आज यानी 23 जुलाई को जयपुर की अदालत ने राजस्थान के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) को आदेश दिया है कि शेखावत के खिलाफ़ जांच शुरू की जाए। किस केस में? 884 करोड़ के संजीवनी क्रेडिट कोआपरेटिव सोसायटी घोटाले के केस में।
इस घोटाले की जांच SOG पिछले साल से कर रही है। इस मामले में याचिका दाख़िल करने वाले ने कहा था कि इस घोटाले के कुछ पैसे शेखावत, उनकी पत्नी और उनके परिजनों के खातों में ट्रांसफ़र किए गए थे। SOG को इस बारे में कुछ चीज़ें मिली थीं, लेकिन इस बाबत कोई जांच नहीं की गयी।
क्या है घोटाला? लगभग 884 करोड़ रुपयों के इस घोटाले की कहानी 2008 से शुरू होती है। जब संजीवनी क्रेडिट कोआपरेटिव सोसायटी की नींव रखी गयी। जमाकर्ताओं को लालच दिया गया कि अगर पैसा जमा करते हैं तो ज़्यादा ब्याज मिलेगा। पैसे जमा किए गए. और आरोप है कि जमाकर्ताओं का सारा पैसा फ़र्ज़ी लोन खातों से ज़रिए पार लगा दिया गया। 2019 आते-आते राजस्थान के कई इलाक़ों में खोले गए कम्पनी के दफ़्तर बंद हो गए। 24 अगस्त 2019 को पहली FIR दर्ज करवाई गयी। जांच शुरू हुई। कुछ लोग गिरफ़्तार हुए। अब शेखावत को भी लपेटे में लिया गया है।
इसके पहले SOG ने ऑडीयो टेप मामले में भी शेखावत को नोटिस भेज था। वही टेप जिसमें दो लोग गहलोत कैम्प के विधायकों को लालच देने की बात कर रहे थे। दावा किया गया कि फ़ोन में एक आवाज़ शेखावत की है। शेखावत ने इंकार किया। कहा कि किसी भी जांच का सामना करने को तैयार हैं।


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