सचिन पायलट को चार दिन की मिली कानूनी मोहलत ने अपने विधायकों की बगावत की सियासी चुनौती से जूझ रही कांग्रेस की मुश्किलें ज्यादा बढ़ा दी हैं। गहलोत समर्थक अपने विधायकों को इतने लंबे समय तक घेरेबंदी में रखना पार्टी के लिए सहज नहीं हो रहा। वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस के तमाम आक्रामक प्रयासों के बावजूद पायलट ने विधायकों को तोड़ने का अपना दांव छोड़ा नहीं है। पायलट के इन प्रयासों में भाजपा के खुले समर्थन की सियासी आहटों ने भी कांग्रेस की चुनौती और चिंता दोनों में इजाफा किया है।
कांग्रेस सतर्क, कानूनी मोहलत में पायलट के सियासी प्रयासों को लेकर बेहद सतर्क पार्टी
पार्टी सूत्रों ने कहा कि बेशक हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई पूरी होने तक मिली मोहलत के बीच पायलट की बगावत को लेकर कांग्रेस पहले से कहीं ज्यादा सतर्क है। क्योंकि गहलोत के साथ डटे विधायकों में सेंध लगाने का पूरा प्रयास पायलट और भाजपा की ओर से किया जा रहा है।
पायलट के पीछे भाजपा की ताकत बढ़ा रही कांग्रेस-गहलोत की परेशानी
पार्टी की अंदरूनी चर्चा में कहा जा रहा कि विधायकों पर डोरे डालने के पायलट के प्रयासों को थामना गहलोत के लिए बहुत मुश्किल नहीं है, लेकिन उनकी परेशानी इसीलिए बढ़ रही कि अब तक परोक्ष रुप से पायलट के पीछे खड़ी भाजपा पूरी ताकत से खुलकर उनके समर्थन में मैदान में उतर गई है।
विधायकों को लंबे समय तक एकजुट रख पाने को लेकर कांग्रेस की चिंता बढ़ गई
पार्टी सूत्रों ने दावा किया कि भाजपा के कई केंद्रीय रणनीतिकार राजस्थान में आपरेशन लोटस के लिए सक्रिय हो गए हैं। इसीलिए जयपुर में अपने विधायकों को लंबे समय तक एकजुट रख पाने को लेकर कांग्रेस की चिंता ज्यादा बढ़ गई है।


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