जयपुर, राजस्थान।
राजस्थान में फिलहाल निकाय चुनाव को लेकर एक बार फिर चुनावी माहौल बन गया हैं। भाजपा और कांग्रेस दिन रात निकाय चुनाव के लिए मेहनत कर रही हैं। वही इस बीच प्रदेश की क्षेत्रीय पार्टी RLP ने निकाय चुनाव नहीं लड़ने का फैंसला किया। रालोपा के इस फैंसले के बाद एक बार फिर राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई हैं। हालांकि रालोपा ने यह फैंसला क्यों किया और कैसे किया, रालोपा की क्या मजबूरी रही? इन सवालों के जवाब तो पार्टी के मुखिया हनुमान बेनीवाल ही जानते हैं, लेकिन राजनीतिक विश्लेषण के जरिये हम इन बातों के जवाब देने की कोशिश करेंगें।
रालोपा और भाजपा ने लोकसभा चुनाव में गठबंधन किया, इसमें इस गठबंधन ने 25 की 25 सीटों पर कब्जा किया, इस चुनाव में हनुमान बेनीवाल सांसद बन गए। अभी हुए उपचुनाव में यह गठबंधन बरकरार रहा और हनुमान बेनीवाल के भाई नारायण बेनीवाल विधायक बन गए। इस उपचुनाव में हुई जीत के बाद हनुमान बेनीवाल ने वसुंधरा राजे और यूनुस खान पर एक आरोप लगाया और भाजपा आलाकमान से शिकायत करी, कि गठबंधन होने के बाद भी इन नेताओं ने कांग्रेस को सपोर्ट किया।
बेनीवाल के इस आरोप के बाद भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां भड़क गए और उन्होंने हनुमान बेनीवाल को कड़ी नसीहत भी दी। पूनियां ने यह भी कह दिया कि वो अपनी पार्टी देखें। इसके बाद सतीश पूनियां ने एक बयान और दिया और कहा कि निकाय चुनाव BJP रालोपा से गठबंधन नहीं करेगी। पूनियां के इस बयान के बाद एक बार फिर यह गठबंधन चर्चा में आ गया। मीडिया में गठबंधन टूटने की खबरें वायरल हो गई।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए हनुमान बेनीवाल ने कहा कि रालोपा का शहरी क्षेत्रों में काफी वजूद हैं। निकाय चुनाव लड़ने के लिए भी बेनीवाल ने कहा कि बैठकर चर्चा की जाएगी, जहाँ कार्यकर्ताओं की इच्छा होगी, वहाँ रालोपा चुनाव लड़ेगी। लेकिन रविवार को हनुमान बेनीवाल ने घोषणा कर दी कि अब RLP निकाय चुनाव नहीं लड़ेगी।
रालोपा के निकाय चुनाव नहीं लड़ने से क्या होगा?
अगर RLP यह चुनाव नहीं लड़ती हैं और इस निकाय चुनाव में भाजपा को समर्थन देती हैं, तो रालोपा-भाजपा गठबंधन बना रहेगा और आने वाले चुनावों में यह गठबंधन फिर से दिखाई दे सकता हैं। इस प्रकार रालोपा ने निकाय चुनाव नहीं लड़ने का फैंसला लेकर अपना गठबंधन टूटने से बचा लिया।

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