खींवसर उपचुनाव- क्या बेनीवाल परिवार एक बार फिर भारी पड़ेगा मिर्धा परिवार पर

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नागौर, राजस्थान।

राजस्थान उपचुनाव को लेकर कल गुरुवार को मतगणना होगी, इस उपचुनाव हॉट सीट बनी खींवसर के नतीजे पर एक बड़ा राजनीतिक रसूख टिका हुआ है। इस नतीजे के बाद ही हरेन्द्र मिर्धा और नारायण बेनीवाल का राजनीतिक भविष्य तय होगा। हालांकि इस उपचुनाव में कड़ा मुकाबला बताया जा रहा हैं,वही दोनों प्रत्याशी जीत का दावा भी कर रहे हैं। इस उपचुनाव में मतदान प्रतिशत कम होने की चिंता भी सभी को। 2013 और 2018 से भी मतदान प्रतिशत इस उपचुनाव में रहा हैं।


क्या बेनीवाल परिवार एक बार फिर मिर्धा परिवार को देगा मात

बेनीवाल परिवार और मिर्धा परिवार में राजनीतिक लड़ाई काफी सालों से है। 1980 के विधानसभा चुनाव में हरेन्द्र मिर्धा और रामदेव बेनीवाल के बीच राजनीतिक संघर्ष शुरू हुआ, जिसमें हरेन्द्र मिर्धा जीत गए। इसके बाद 1985 में फिर हरेन्द्र मिर्धा और रामदेव बेनीवाल आमने-सामने हुए, इस बार रामदेव बेनीवाल जीत गए।

पिछले लोकसभा चुनाव 2014 में ज्योति मिर्धा कांग्रेस से प्रत्याशी थी, उनके सामने हनुमान बेनीवाल ने निर्दलीय ताल ठोक दी, इस चुनाव में दोनों की लड़ाई का फायदा भाजपा को हुआ और भाजपा के सी आर चौधरी जीत गए। ज्योति मिर्धा और हनुमान बेनीवाल इस चुनाव में दोनों ही हार गए। ज्योति की हार का इस चुनाव में सबसे बड़ा कारण बेनीवाल को ही बताया गया।

हाल ही में 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में भी हनुमान बेनीवाल और ज्योति मिर्धा में सीधा मुकाबला हुआ और इस लोकसभा चुनाव में हनुमान बेनीवाल ने भारी मतों से जीत दर्ज करके ज्योति मिर्धा को हरा दिया। इस प्रकार बेनीवाल परिवार ने एक बार और मिर्धा परिवार को मात दी।

अब यह उपचुनाव हो रहा हैं, इसमें मिर्धा परिवार के हरेन्द्र मिर्धा प्रत्याशी हैं, तो उनके सामने हनुमान बेनीवाल के भाई और रामदेव बेनीवाल के बेटे नारायण बेनीवाल। कल इस उपचुनाव के नतीजे हमारे सामने होंगें। क्या इस बार भी बेनीवाल परिवार मिर्धा परिवार पर भारी पड़ेगा??

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