जयपुर, राजस्थान।
राजस्थान प्रदेश की 2 बार मुख्यमंत्री रह चुकी वसुंधरा राजे इन दिनों राजस्थान की राजनीति से गायब सी हो गई हैं। वसुंधरा राजे राजस्थान में भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा थी, इसी कारण वो राजस्थान की 2 बार मुख्यमंत्री बन पाई। अभी राजस्थान विधानसभा चुनाव को एक साल भी पूरा नहीं हुआ, तब तक वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री थी और इतने ही महीनों में वसुंधरा राजे की यह दुर्गति हो गई, आखिर इसका क्या कारण हैं?
आखिर क्या हुआ कि वसुंधरा राजे राजस्थान की राजनीति से एकदम गायब ही हो गई। हाल ही में राजस्थान में 2 जगह उपचुनाव भी थे, लेकिन इस उपचुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे एक भी जगह नहीं दिखाई, न ही वसुंधरा राजे प्रत्याशियों की नामांकन रैली में शामिल हुई, न ही वसुंधरा राजे प्रचार करने गई, जबकि वो राजस्थान से 2 बार मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। उनके अलावा भाजपा के सभी बड़े नेता इस उपचुनाव में खूब प्रचार कर रहे थे, लेकिन वसुंधरा राजे इस उपचुनाव में कोई प्रचार करती नहीं दिखाई दी।
वसुंधरा राजे कई दिनों से धौलपुर में रुकी हुई हैं। वो भाजपा के किसी कार्यक्रम में कोई भाग भी नहीं ले रही हैं, हाल ही में भाजपा के नए प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां को नियुक्त किया हैं, वो उनके पदभार ग्रहण में भाग लेने नहीं आई, जबकि राजस्थान के सभी भाजपा नेता इस कार्यक्रम में मौजूद थे। सतीश पूनियां को प्रदेशाध्यक्ष बने हुए 1 महीने से ज्यादा हो गया, लेकिन राजे ने अभी पूनियां से कोई मुलाकात नही की। इसके क्या कारण हैं, आइये हम चर्चा करते हैं।
वसुंधरा राजे की दुर्गति इस कारण हुई क्या??
दरअसल राजस्थान विधानसभा चुनाव में हार के कारण भाजपा आलाकमान में वसुंधरा राजे के खिलाफ एक नेगेटिव मैसेज गया, क्योंकि इस समय भाजपा हर जगह जीत रही थी, लेकिन राजस्थान में भाजपा हार गई। इसके अलावा राजस्थान भाजपा में गुटबाजी भी हो गई थी, आलाकमान और वसुंधरा राजे में अनबन भी इसका एक बड़ा कारण हैं।
इसके बाद लोकसभा चुनाव में भी वसुंधरा राजे कोई सक्रिय भूमिका में नहीं दिखी, उनकी इच्छा के खिलाफ लोकसभा चुनाव में रालोपा से गठबंधन हुआ। मदनलाल सैनी के बाद वसुंधरा राजे अपनी पसन्द का प्रदेशाध्यक्ष नियुक्त करवाना चाहती थी, लेकिन आलाकमान ने सतीश पूनियां को प्रदेशाध्यक्ष बनाया, इसके बाद उपचुनाव में भाजपा ने रालोपा से गठबंधन किया। यह सब वसुंधरा राजे की इच्छा के उल्ट हुआ और इनमें से किसी मे भी वसुंधरा राजे की कोई सक्रियता नजर नहीं आई। यही कारण हैं कि अब वसुंधरा राजे ने चुप्पी साध ली हैं और वो दिनोंदिन राजस्थान की राजनीति से दूर हो रही हैं।

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