नागौर, राजस्थान।
राजस्थान की राजनीति में आजादी के बाद से ही मिर्धाओं के पास काफी राजनीतिक वजूद था, लेकिन वो वजूद कायम नहीं रहा हैं। कल खींवसर उपचुनाव के आये परिणाम के बाद यह बात और साबित हो गई। इस उपचुनाव में हरेन्द्र मिर्धा को नारायण बेनीवाल ने चुनाव हरा दिया, इसी हार के साथ हरेन्द्र मिर्धा के खाते में एक और हार जुड़ गई। वैसे तो हरेन्द्र मिर्धा राजस्थान में कैबिनेट मंत्री भी रहे थे और केंद्र स्तर पर भी मिर्धा कई बड़े पदों पर रहे, लेकिन अब चुनाव जीतना उनके बस की बात नहीं रही।
69 की उम्र में हारा पांचवां चुनाव, इससे पहले 4 बार हारे
हरेन्द्र मिर्धा ने 1980 में राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। 1980 में मिर्धा मुंडवा से विधायक बने थे। मिर्धा राजस्थान सरकार में पीडब्ल्यूडी मंत्री भी रहे। कांग्रेस के सचिव भी रहे। लेकिन मिर्धा 2000 के दशक के बाद राजनीति में कोई बड़ा मुकाम हांसिल नहीं कर पाए। 69 साल के हरेन्द्र मिर्धा अब तक 5 चुनाव हार गए है। इसके पहले मिर्धा ने 1985, 2003, 2008 और 2013 में हार का सामना किया। इसके बाद यह विधानसभा उपचुनाव 2019 मिर्धा फिर से हार गए। इस तरह मिर्धा को 5 चुनावों में हार का सामना करना पड़ा हैं।

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