नागौर, राजस्थान।
नागौर में पिछले 4 दिनों से बंजारा परिवार का मामला काफी गर्माया हुआ है। आज रालोपा नागौर में विशाल धरना प्रदर्शन कर रही हैं, अब इस मामले में नागौर से पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा कूद पड़ी हैं। मिर्धा ने नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल पर कई बड़े आरोप लगाए है। मिर्धा ने कहा कि बेनीवाल गरीब बंजारा परिवारों पर राजनीति कर रहे हैं, उन्होंने अपने विधायकों को भेजकर भीड़ को उकसाया और इस घटना में एक आदमी की जान चली गई, उस मौत पर भी हनुमान बेनीवाल राजनीति कर रहे है।
ज्योति मिर्धा ने बंजारा मामले में कहा ऐसा
पूर्व सांसद मिर्धा ने सोशल मीडिया साइट्स फेसबुक पर एक पोस्ट लिखकर बताया कि
गौचर भूमि पर बंजारों का अतिक्रमण हटाना हाई कोर्ट का निर्देश था ये नेताजी को भली भाँति ज्ञात था, तभी स्वयं मौके पर ना पहुँच अपनी पार्टी के विधायकों को माहौल ख़राब करने भेजा। प्रशासन की समझाईश के बाद शांतिपूर्वक चलती कार्यवाही में सुनियोजित तरीक़े से ( विधायकों का बयान है की उन्हें नेताजी ने निर्देशित करा)दोनों MLA घटनास्थल पर पहुँचे और व्यवधान डाला, भीड़ को भड़काया और एक निर्दोष को केवल और केवल इनकी, और इनके नेता की वजह से जान गँवानी पड़ी। लाशों पर राजनीति नेताजी के लिए नयी बात नहीं .... आव देखा न ताव मौक़ा देख सरकार पर , प्रशासन पर, दूसरे सभी नेताओं पर अपनी ऊँगली उठा डाली....तहाँ तक की बर्बरता पूर्वक हुई हत्या के लिए भी प्रशासन को दोषी ठहराने में पलक नहीं झपकाई। सवाल ये उठता है की कहीं यह सारा परपंच अपने मकान को बचाने के लिए तो नहीं रचा? क्यूँ की ख़ुद अँगोर की भूमि पर क़ब्ज़ा करके बैठे हैं....कहीं अपने विधायकों को अपनी ढाल बना , बंजारों की बस्ती उजड़ने पर मगरमछ के आँसूँ रोने वाले नेताओं का आख़िरी और असली मक़सद करोड़ों की भूमि पर क़ाबिज़ रहने का ही हो। थोड़ी देर भाषण बाज़ी करी फिर चल दिए फ़ीते काटने.......जनता को भी सोचना चाहिए कि उनके आशीर्वाद से सांसद बने नेताजी ख़ुद क्यूँ नहीं पहुँचे बंजारा बस्ती?....ना ही अपने भाई को भेजा और तो और अपने ख़ास चमचों को भी ग़ायब रखा.....MLAs के दलित होने की दुहाई देते हैं फिर उनका मोहरा बना उपयोग कर अब राजनीतिक रोटियाँ सेकने का मौक़ा नहीं गँवाना चाह रहे सो पड़ाव....धरने ... प्रदर्शन की बात कह रहे हैं। नेताजी, मोदी जी की कृपा से आपका क़द मोटरसाइकल छुड़ाने से ऊपर उठ गया है, कृपया समझें.... लोकसभा में 37 दिनों में 35 बोलना अध्यक्ष जी की कृपा है, काम क्या करवाया इसका विवरण दें, मैंने पीने का पानी ला दिया आख़िर आप कब ला रहे हैं नागौर में सिंचाई का पानी?.....उधर, आपके मंच पर माइक पकड़ एक युवा हिस्ट्री शीटर भी चमचागिरी में जाने क्या क्या बक गए.... वैसे ऐसे गुरु के ऐसे ही चेले .... हिस्ट्री शीटर अब ज्ञान- झारे बनने चले। वैसे तो मुझे पूरा विश्वास है आप सब के घर चूल्हा नहीं जला होगा जिस दिन अतिक्रमण हटे , पर जहाँ मैंने ‘चाय’ पी अगले दिन आप भी पीने पहुँच गए..... भाई, हम नेता हैं, आप जैसे गिद्ध नहीं, की लोगों के घर उजड़ें या किसी ग़रीब की जान जाए तो हम घात लगा कर बैठें की भला मौक़ा आया, लपक लो!!....कुछ चीज़ें वोट की राजनीति से ऊपर होती हैं और उन्हें वहीं रहने देना चाहिए। पर कोई इंसानियत समझे तब ना। इस पूरे प्रकरण में सरकार से अनुशंसा करूँगी की न्यायपूर्वक जाँच हो और दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा मिले। मृतक के परिवार को सहायता और वास्तव में जिन बंजारों के पास भूमि नहीं है, उनके पुनर्वास में मदद के लिए मुख्यमंत्री जी से अनुशंसा करी है।

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