चंडीगढ़, हरियाणा।
दुष्कर्म आरोपी डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम को पैरोल देने के मामले में हरियाणा सरकार का रुख नरम पड़ गया है। अब आप सोंच रहे होंगे कि अचानक से हरियाणा सरकार डेरा प्रमुख की पैरवी क्यों करने लग गई। दरअसल आपको याद दिला दें कि विधानसभा के चुनाव आने वाले हैं और हरियाणा की दो दर्जन से ज्यादा सीटों पर डेरा प्रमुख के अनुयायियों की संख्या लगभग पांच से दस हजार है। इसलिए सरकार चाहती है कि डेरा प्रमुख को पैरोल दिया जाए। हालांकि सरकार ने अभी इस मामले में कोई पुष्टि नहीं की है लेकिन खुफिया एजेंसियां अपने स्तर पर जानकारी जुटा रही हैं।
जानकारी के मुताबिक अफसर भी इस मामले में सच बोलने से डर रहे हैं। अब फैसला सिरसा प्रशासन को लेना है कि पैरोल दिया जाए या नहीं। फिलहाल अभी खुफिया एजेंसियों से रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा गया है जिससे पैरोल से जुड़े निर्णय लेने में आसानी हो। सूत्रों के अनुसार एंजेंसियां अपने स्तर पर कार्य कर रही हैं। जिसमें थोडी सी स्थित साफ हुई है कि हरियाणा की भाजपा सरकार रामरहीम को बाहर निकालने का रास्ता ढूंढ रही है।
लोकसभा चुनाव में तो यह सीटें इतनी मायने नहीं रखती थी लेकिन विधानसभा के चुनाव में केवल डेरा प्रमुख के अनुयायियों से लगभग 70 फीसदी वोट हासिल होने की संभावना है। लिहाजा भाजपा सरकार अपने लक्ष्य को भेदने के लिए जरूर चाहेगी कि डेरा प्रमुख को किसी न किसी बहाने से जरूर बाहर लाया जाए।


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