नागौर, राजस्थान।
नागौर लोकसभा सीट पर एनडीए प्रत्याशी हनुमान बेनीवाल ने कांग्रेस की ज्योति मिर्धा को कड़ी शिकस्त दी हैं। बेनीवाल ने मिर्धा को 1,81,260 वोटों से हराया हैं। परिणाम से पहले मीडिया, सर्वे रिपोर्ट , राजनैतिक विशेषज्ञों का कहना था कि इस सीट पर दोनों में कांटे की टक्कर हैं और जीत-हार का अंतर काफी कम रहेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और मिर्धा को बेनीवाल ने इतने बड़े अंतर से चुनाव हराया हैं। अब हम ज्योति मिर्धा के हार के कुछ कारणों पर समीक्षा करेंगें।
ज्योति मिर्धा के हार के प्रमुख कारण यह रहे
1. पार्टी में भितरघात
ज्योति मिर्धा की हार का प्रमुख कारण उनकी पार्टी में भितरघात हैं। नागौर में कांग्रेस पार्टी के तमाम नेता एकजुट नहीं हैं और यह भितरघात कई सालों से इस पार्टी में हैं। लोकसभा चुनावों की टिकट वितरण से पहले यह भीतरघात सबसे ज्यादा देखने को मिला था। नागौर से एक दर्जन नेता मिर्धा का विरोध करने दिल्ली पहुंच गए थे। इस भीतरघात की वजह से ज्योति मिर्धा को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ और उन्हीं इस तरह कड़ी हार मिली।
2. पारिवारिक कलह
मिर्धा परिवार नागौर की राजनीति में सबसे कदावर परिवार माना जाता हैं। इस परिवार ने नागौर में सबसे ज्यादा राज किया। लेकिन इस बार मिर्धा परिवार में पारिवारिक कलह सबसे ज्यादा देखने को मिली। मिर्धा के परिवार के नेता इस चुनाव में एक भी बार एक साथ नहीं देखे गए। इसी परिवार के पूर्व विधायक रिछपाल मिर्धा, पूर्व नेता हरेंद्र मिर्धा, विधायक विजयपाल मिर्धा, तेजपाल मिर्धा इस चुनाव में कई भी ज्योति मिर्धा के साथ नहीं दिखे। इस कलह के कारण ही मिर्धा को।काफी नुकसान उठाना पड़ा।
3. मिर्धा की नागौर से अनुपस्थित
मिर्धा की कड़ी हार का सबसे बड़ा कारण हैं कि नागौर लोकसभा से उनकी अनुपस्थिति। मिर्धा पिछले 5 साल से नागौर से पूरी तरह से गायब रही और चुनावों के वक्त मिर्धा नागौर में आई, जिसका काफी विरोध भी देखने को मिला। मिर्धा ने पिछले 5 साल में किसी भी कार्यक्रम और मामले में भाग नहीं लिया। इसका नुकसान भी मिर्धा को उठाना पड़ा।
4. कार्यकर्ताओं से जुड़ाव
मिर्धा का कार्यकर्ताओ से जुड़ाव काफी कम है। पिछले 5 साल में यह जुड़ाव तो बिल्कुल भी नहीं रहा। जब मिर्धा 2009 में नागौर से सांसद बनी, उस समय भी मिर्धा का कार्यकर्ताओ से जुड़ाव नहीं था। कार्यकर्ताओं और मिर्धा में आपसी सम्बंध नहीं थे और न ही कोई जुड़ाव। इसका नुकसान भी मिर्धा को सबसे ज्यादा झेलना पड़ा।
5. कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता
मिर्धा की हार का पांचवा कारण उनके कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता हैं। मिर्धा के कार्यकर्ताओं अपने क्षेत्र में कम सक्रिय थे। जिस दिन मतदान हो रहा था, उस दिन सबसे ज्यादा उनकी निष्क्रियता ही दिखी। बूथ स्तर पर मतदान के लिए बूथों पर मिर्धा के कार्यकर्ताओं नहीं दिखे, जिसके इनके पक्ष में मतदान भी सबसे कम हुआ। इसी कारण सभी 8 विधानसभा में से 7 विधानसभा में हार मिली।

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