बाड़मेर, राजस्थान।
राजस्थान की 25 लोकसभा सीटों में बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट अपना अहम स्थान रखती हैं, यह सीट कई बार हॉट सीट भी बनी हुई हैं। आज हम इस सीट का पूरा गणित आपको बताने जा रहे है। भारत मे अब तक 16 लोकसभा चुनाव हो चुके हैं। अब 17 वां लोकसभा चुनाव होने जा रहा हैं। इस बार यहाँ भाजपा ने कैलाश चौधरी को मैदान में उतारा हैं, तो कांग्रेस ने मानवेंद्र सिंह को और बसपा ने पूर्व आईपीएस पंकज चौधरी को मैदान में उतारा हैं। इस सीट पर कैलाश चौधरी और मानवेंद्र सिंह के बीच सीधी कांटे की टक्कर हैं।
बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट का इतिहास
बाड़मेर-लोकसभा सीट में 8 विधानसभा क्षेत्र आते हैं- जैसलमेर, बाड़मेर, शिव, चोहटन, गुढ़ामालानी, बायतु, सिवाना, पचपदरा। यह लोकसभा सीट 9 बार कांग्रेस ने जीती हैं, तो 2 बार भाजपा ने, 2 बार निर्दलीय उमीदवारों ने और 3 बार अन्य दलों के उमीदवारों ने जीती हैं। जब पहली बार 1952 में चुनाव हुए तो यहाँ पर निर्दलीय उमीदवार ही चुनाव जीता था, दूसरी बार भी निर्दलीय ही चुनाव जीता। उसके बाद कांग्रेस ने अपना खाता खोला।
इस लोकसभा सीट पर कर्नल सोनाराम चौधरी अब तक 4 बार सांसद रह चुके है, जो सबसे ज्यादा बार सांसद रहे है। वहीं मानवेन्द्र सिंह ने 2004 में अब तक की सबसे बड़ी जीत इस सीट से दर्ज की हैं। इस सीट से कल्याण सिंह कालवी संसद में जाकर ऊर्जा मंत्री बने थे। इस लोकसभा सीट पर राजपूत, जाट और मुस्लिम समाज के वोट बाहुल्य संख्या में भी हैं।
2014 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए कर्नल सोनाराम चौधरी ने चुनाव जीता। दूसरे नम्बर पर उस समय भाजपा से टिकट कटने से नाराज चल रहे जसवंत सिंह, जो निर्दलीय चुनाव लड़ रहे थे, रहे थे, जबकि तीसरे नम्बर पर कांग्रेस के हरीश चौधरी रहे थे। 2009 के लोकसभा चुनावों में बाड़मेर सीट से कांग्रेस के हरीश चौधरी चुनाव जीते थे। वहीं 2004 लोकसभा चुनावों में मानवेंद्र सिंह जसोल चुनाव जीते थे।
बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट की वर्तमान स्थिति
1. मानवेंद्र सिंह जसोल कांग्रेस
इस सीट पर भाजपा से कांग्रेस में आये मानवेन्द्र सिंह को कांग्रेस में टिकट दिया हैं। मानवेंद्र सिंह भारत सरकार के विदेश मंत्री और वित्त मंत्री रहे जसवंत सिंह के बेटे है। मानवेन्द्र सिंह ने 2004 में इस लोकसभा सीट से सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी। मानवेंद्र सिंह के पिता जसवंत सिंह ने पिछले चुनाव में कुछ ही वोटों से हार का सामना किया था। मानवेंद्र सिंह के साथ कांग्रेस वोटर, राजपूत वोटर और उनके परम्परागत वोटर साथ मे हैं। इस लोकसभा क्षेत्र में इनकी अच्छी खासी पकड़ हैं।
2. कैलाश चौधरी भाजपा
कैलाश चौधरी पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। 2013 के विधानसभा चुनावों में पहली बार कैलाश चौधरी विधानसभा पहुंचे थे। उससे पहले 1 विधानसभा चुनाव कैलाश चौधरी हार गए है। 2018 के विधानसभा चुनाव में कैलाश चौधरी को कांग्रेस के हरीश चौधरी ने फिर हरा दिया। अब कैलाश चौधरी को भाजपा ने अपना लोकसभा उमीदवार बनाया हैं। साथ मे भाजपा ने अपने सांसद कर्नल सोनाराम का टिकट काट दिया हैं। कर्नल सोनाराम चौधरी ने टिकट कटने से नाराजगी जताई हैं और अभी तक वो कहाँ जायेंगे, उन्होंने कुछ नहीं बताया हैं।
3. पंकज चौधरी बसपा
पंकज चौधरी पूर्व आईपीएस रह चुके है और अपने कार्यकाल में उन्होंने जैसलमेर में अपनी सेवा दी हैं। बहुजन समाज पार्टी ने उनको टिकट दिया हैं। पंकज चौधरी का नामाकंन रदद् किया गया था, लेकिन अब उनको हाइकोर्ट से हरी झंडी मिल गई हैं। पंकज चौधरी का नाम ईमानदार अफसर के तौर पर लिया जाता हैं। इस सीट पर वो भी अपनी ताल ठोक रहे है। उनके साथ बसपा के वोटर हैं, तो उनके चाहने वाले भी उनके साथ हैं।
बेनीवाल फेक्टर भी इस सीट पर करेगा काम
इस सीट पर भाजपा और रालोपा के गठबंधन का असर भी देखने को मिलेगा। 2018 के विधानसभा चुनावों में इस सीट पर बेनीवाल फेक्टर का काफी असर देखा गया था। अब बेनीवाल ने भाजपा से गठबंधन कर लिया है, तो बेनीवाल खुलेआम कैलाश चौधरी को सपोर्ट करेंगें, जिसके कारण इस सीट का गणित बिगड़ सकता हैं। बेनीवाल की वजह से ही कैलाश चौधरी विधानसभा चुनाव हार गए थे। लेकिन अब बेनीवाल कैलाश चौधरी के साथ हैं।

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