क्या आप जाट महाराजा सूरजमल की उदारता की यह कहानी जानते हो, नहीं तो जरूर पढ़ें यह कहानी

INC News
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आज 13 फरवरी को महाराजा सूरजमल, जिन्हें युग निर्माता, जाट शक्ति, हिन्दू सम्राट नामों से भी जाना जाता हैं, की आज जयंती हैं। महाराजा सूरजमल का जन्म 13 फरवरी 1707 को हुआ था। महाराजा सूरजमल हिंदू सम्राटों में एकमात्र ऐसे सम्राट थे, जिन्होंने कभी मुगलों के सामने घुटने नहीं टेके। आज हम आपको महाराजा सूरजमल की उदारता की एक ऐसी कहानी बताने जा रहे हैं, जिसे पढ़कर आप भी महाराजा सूरजमल पर गर्व करोगे।



महाराजा सूरजमल की उदारता की कहानी

महाराजा सूरजमल की लड़ाई मुगलों के साथ-साथ मराठों से भी कई बार हुई थी। मराठों ने दिल्ली के मुगलों के कहने पर महाराजा सूरजमल के लोहागढ़ किले पर आक्रमण किया था। एक तरह से मराठा महाराजा सूरजमल के दुश्मन बन गए थे। इतनी बड़ी दुश्मनी होने के बाद भी महाराजा सूरजमल ने मराठों की ऐसे समय मे सहायता की थी, जिसे देख मराठा भी आश्चर्यचकित हो गए।

दरअसल पानीपत की तीसरी लड़ाई मराठो और अहमद शाह अब्दाली के बीच हुई थी, इस युद्ध मे मराठो के एक लाख सेनिको में से आधे से ज्यादा सैनिक मारे गए थे। न तो मराठो के पास खाने-पीने का सामान था और न ही उनके पास कोई हथियार बचे थे। मराठो के भूखे प्यासे सैनिक वापस लौट पड़े, वो भरतपुर क्षेत्र से ही वापस गए थे। न तो उनके पास सर्दी में पहनने को कपड़े थे, न ही राशन और घायल सैनिकों के लिए कोई दवा दारू। महाराजा सूरजमल ने अपनी उदारता दिखाते हुए उन सभी सैनिकों को 10 दिन तक खान-पान दिया और घायल सैनिकों का उपचार करवाया। जाते हुए सैनिकों को कपड़े, रुपए और राशन भी दिया था। 

महाराजा सूरजमल की इतनी उदारता देख मराठा भी आश्चर्यचकित हो गए। ऐसे उदार, कुशाग्र बुद्धि वाले महाराजा सूरजमल को INC NEWS नमन करता हैं।

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