एक ओर जहाँ सरकारें गाय और पशुओं पर राजनीति कर रही हैं, वहीं किसानों पर यह पशु हावी हो रहे है। पिछले 2 महीनों में लगभग 10 किसानों की मौत आवारा पशुओं के मारने के कारण हो गई हैं, इनमें राजस्थान, उत्तरप्रदेश और हरियाणा के किसान शामिल है। इस दौरान किसानों के खेतों में रबी की फसल हैं, जिसमें गेंहू, चना, सरसों मुख्य फसलें हैं। किसानों को रात भर जागकर इन फसलों को आवारा पशुओं से बचाना होता हैं।
एक किसान उसी तरह अपनी फसल को बचाता हैं, जैसे एक सैनिक अपने देश को दुश्मनों से बचाता हैं। अगर एक भी रात किसान सो गया तो उसकी 3-4 महीने की फसल चौपट हो जाती हैं। सिर्फ एक रात सोने की इतनी बड़ी सज़ा मिलने के डर से बेचारा और बेसहारा किसान एक रात भी नहीं सोता हैं।
इसी किसान की ड्यूटी के दौरान भी कुछ आवारा पशुओं का आतंक उन किसानों पर हावी हो जाता हैं और पशु किसान पर हमला बोल देते हैं, वहीं उसी जमीन पर किसान सुबह मृत अवस्था मे ज़मीन पर पड़ा मिलता हैं।
सरकार पशुओं पर राजनीति करे या न करे, किसानों को इस बात से सरोकार नहीं हैं। सरकार को पशुओं के लिए जगह-जगह गौशाला खिलानी चाहिए, साथ उनमें चारे-पानी को व्यवस्था करनी चाहिए। कहीं जगहों पर गौशाला तो हैं, लेकिन चारे-पानी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं कि गई हैं, जिसके कारण पशु आवारा घूमते हैं और रात के किसानों को उन पशुओ के कारण परेशानी झेलनी पड़ती हैं।
ऊँपर से किसानों को सिंचाई के लिए बिजली भी रात में दी जाती हैं और उसके ऊँपर इन पशुओं का आतंक। दिन में भी किसान को खेतों में काम करना पड़ता हैं। इस तरह किसानों के यह 4 महीने नींद और चैन दोनों छीन लेते हैं



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