जयपुर, राजस्थान। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की मिलीभगत का अब पर्दाफाश हो गया। इसके मामले में विधायक बेनीवाल ने सबूत भी दिए। दरअसल जब साल 2013 में वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री बनी थी, तो वसुंधरा ने अशोक गहलोत को सरकारी बंगला दिया था। अब साल 2018 में जब अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने उसी आधार पर वसुंधरा राजे को सरकारी बंगला दिया हैं।
इसी बात को लेकर विधायक बेनीवाल अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे पर सवाल खड़े किए हैं। साथ मे बेनीवाल ने इसके सबूत भी दिए।
क्या कहता हैं उच्चतम न्यायालय का नियम? जाने
जब कोई मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देता हैं, तो वो फिर सामान्य आदमी हो जाता हैं। उसको आजीवन सरकारी बंगला नहीं दे सकते। यह बात हमारे सविंधान में लिखी हुई हैं। इस नियम की एक कॉपी विधायक बेनीवाल ने अपने ट्विटर अकाउंट पर अपलोड की हैं, जिसकी फ़ोटो हम भी दिखा रहे हैं। वह फ़ोटो आप नीचे देख सकते हैं। उसमें उच्चतम न्यायालय के नियम साफ़-साफ़ लिखे हैं।विधायक बेनीवाल ने इस मामले में यह कहा-
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सयोंजक और खींवसर विधायक बेनीवाल ट्वीट करते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरकार के द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को सरकारी बंगला देने पर कोर्ट के आदेशों की अवहेलना होना बताया हैं।ये रहें इस मिलीभगत के सबूत-
साल 2013 में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सिविल लाइन्स का बंगला नम्बर 13 दिया था, अब साल 2018 में गहलोत सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को उसी आधार पर बंगला नम्बर 13 वापिस दिया हैं। यह बात उच्चतम न्यायालय के खिलाफ हैं। क्योंकि न्यायालय के नियमों में ऐसा नहीं लिखा है।इसी बात को लेकर विधायक बेनीवाल अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे पर सवाल खड़े किए हैं। साथ मे बेनीवाल ने इसके सबूत भी दिए।





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