KBC 17 में कुमार मंगलम बिड़ला का बड़ा खुलासा: रतन टाटा से इतना भरोसे का रिश्ता कि शेयर भी ज़्यादा थे

SunilKaGyan
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Birla group

आज कौन बनेगा करोड़पति 17 (KBC 17) के एक विशेष एपिसोड में इंडस्ट्री जगत के चर्चित नाम कुमार मंगलम बिड़ला ने अपने जीवन, पारिवारिक मूल्यों और भारतीय उद्योग जगत के दो सबसे बड़े परिवारों — बिड़ला और टाटा परिवार — के बीच गहरे भरोसे और सम्मान के रिश्ते को साझा किया। 

इस एपिसोड में बिड़ला न सिर्फ एक सफल व्यवसायी के रूप में बल्कि एक इंसान के रूप में अपनी भावनाओं, चुनौतियों और सीखों को साझा करते दिखे। उनके प्रेरणादायक विचार और पारिवारिक अनुभवों ने दर्शकों का दिल जीत लिया।


🧠 बचपन से व्यवसाय तक: एक प्रेरणादायक यात्रा

कुमार मंगलम बिड़ला का जन्म 14 जून 1967 को कोलकाता में हुआ था, और वे आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन के रूप में जाने जाते हैं। बचपन से ही व्यापार की दुनिया से जुड़े होने के कारण बिड़ला ने शिक्षा को गंभीरता से लिया। उन्होंने अपने शैक्षिक सफर को लंदन बिज़नेस स्कूल से MBA तक पहुंचाया और भारत में चार्टर्ड एकाउंटेंट भी बने। उनके पिता ने यह शर्त रखी थी कि अगर वे परिवार के व्यवसाय में शामिल होना चाहते हैं तो पहले उन्हें CA बनना होगा — जो उन्होंने दृढ़ संकल्प के साथ पूरा किया। 

यह निर्णय उनके जीवन का मोड़ साबित हुआ क्योंकि इससे न केवल उन्हें व्यवसाय की मजबूत नींव मिली, बल्कि उन मूल्यों को भी पाला जो आज उनके नेतृत्व में आदित्य बिड़ला समूह को वैश्विक स्तर पर पहचान दिला रहे हैं!


🧡 पारिवारिक मूल्य और भावनात्मक मजबूती

एपिसोड के दौरान बिड़ला ने अपने परिवार के साथ बिताए समय, अपने पिता आदित्य कुमार बिड़ला और दादा बंसत कुमार बिड़ला की यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि उनके परिवार में पारस्परिक विश्वास, अनुशासन और मानवीय मूल्यों की परंपरा किस तरह पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती आ रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि उनके दादा और पिता ने उन्हें सिखाया कि कारोबार सिर्फ मुनाफे का खेल नहीं है, बल्कि मूल्यों पर टिके एक मजबूत आधार की तलाश है। यही कारण है कि आज आदित्य बिड़ला समूह न केवल आर्थिक रूप से मजबूत है, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और नैतिक व्यापार प्रथाओं के लिए भी जाना जाता है।


🤝 बिड़ला और टाटा: भरोसे की अटूट मिसाल

सबसे रोमांचक और प्रभावशाली हिस्सा तब आया जब अमिताभ बच्चन ने उनसे टाटा परिवार के साथ उनके पुराने रिश्तों के बारे में पूछा। इसपर बिड़ला ने खुलकर बताया कि उनके दादा ज.आर.डी. टाटा और उनके दादा बंसत कुमार बिड़ला के बीच गहरा मित्रता का रिश्ता था। यही नहीं, एक समय ऐसा भी आया जब बिड़ला परिवार के पास कुछ टाटा कंपनियों में खुद टाटा से भी अधिक शेयर थे। 

यह तथ्य दर्शाता है कि यह संबंध प्रतिस्पर्धा पर आधारित नहीं था, बल्कि आपसी विश्वास, सम्मान और साझेदारी पर टिका हुआ था। बिड़ला ने इसे “इतना भरोसे का रिश्ता था” कहकर व्यक्त किया, जो आज के समय में भी व्यवसायिक दुनिया में कम ही देखने को मिलता है। 

यह रिश्ते की गहराई सिर्फ व्यवसाय तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी दोनों परिवारों ने एक दूसरे के सुख-दु:ख में साथ दिया। बिड़ला ने कहा कि उनके पिता के अंतिम संस्कार के समय रतन टाटा वहाँ मौजूद थे और उन्होंने उन्हें “हमेशा याद रखना कि मेरे पास तुम्हारा दोस्त हमेशा है” कहकर सांत्वना दी थी। 

इस संबंध को भारत के उद्योग जगत की एक उत्कृष्ट मिसाल माना जा सकता है, जहाँ दो अलग-अलग वृहद व्यापारिक घरानों के बीच गहरा भरोसा और स्नेहात्मक रिश्ता कायम रहा। 


📺 KBC 17: सिर्फ एक क्विज़ शो नहीं — जीवन के सबक का मंच

कौन बनेगा करोड़पति 17 का यह एपिसोड सिर्फ एक गेम शो नहीं रहा; यह सफल होने के साथ-साथ मानवता, रिश्तों और जीवन के मूल्यों को समझने का मंच भी बना। बिड़ला ने न केवल अपने व्यवसायिक सफर की बातें बताई, बल्कि जीवन के उन पहलुओं को उजागर किया जो आम जीवन में भी प्रेरणा देते हैं — जैसे कि परिवार के प्रति निष्ठा, कठिनाइयों का सामना और सच्चे मित्रों की अहमियत। 

उनकी बातों से यह स्पष्ट होता है कि सिर्फ पूंजी या सफलता ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि वह रिश्ता, विश्वास और सम्मान जो इंसान अपने साथियों और परिवार के साथ बनाता है, वे जीवन में वास्तव में मायने रखते हैं।


📌 निष्कर्ष

कुमार मंगलम बिड़ला का यह एपिसोड दर्शकों को प्रेरित करने वाला और भावनात्मक रूप से समृद्ध रहा। उन्होंने KBC 17 के मंच से यह संदेश दिया कि सफलता के पीछे सिर्फ कठिन परिश्रम नहीं, बल्कि विश्वास, रिश्तों का सम्मान और पारिवारिक मूल्यों की गहराई भी उतनी ही अहम है।

बिड़ला और टाटा परिवार की साझेदारी और मित्रता आज भी भारतीय उद्योग जगत के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है, जो यह दर्शाती है कि व्यापार की दुनिया में भी इन्सानियत और सम्मान सर्वोपरि मूल्य हैं।

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