दरअसल राजस्थान सरकार ने कोरोना की बीच मंडियों में कई फसलो की खरीदारी शुरू की हैं। अब सरकार ने मंडियों में 2 % टैक्स लगाया हैं, जिसका नाम कृषक कल्याण टैक्स हैं। लेकिन जैसे ही यह टैक्स लगाने की खबर सामने आई तब राजस्थान के किसानों ने नाराजगी जताई। किसान नेताओ ने आंदोलन की भी चेतावनी दे दी, वही युवा किसानो ने ट्विटर पर इस मामले को ट्रेंड भी करवाया। लेकिन पहली बार इस मामले में किसानों के साथ व्यापारी भी देखें गए। आखिर इस टैक्स के पीछे सच्चाई क्या है? आइये जानते हैं।
इस टैक्स से किसको नुकसान: किसान या फिर व्यापारी को?
दरअसल यह टैक्स कृषि कल्याण कोष के लिए लगाया गया हैं। राजस्थान की गहलोत सरकार ने बजट में एक कृषि कल्याण कोष की घोषणा की थी, यह कोष 1000 करोड़ का होगा और यह अलग से सिर्फ किसानों के लिए होगा। इसी कृषि कल्याण कोष के लिए सरकार ने 2% यह टैक्स लगाया हैं।
हालांकि सामान्य किसानों को इस टैक्स से कोई फर्क नहीं पड़ेगा, उनकी फसल मंडी में समर्थन मूल्य पर ही बिकेगी, लेकिन इस टैक्स का असर व्यापारियों पर जरूर पड़ेगा, यह टैक्स व्यापारियों से वसूलकर कृषि कल्याण कोष में जमा होगा। इस कारण राजस्थान में मंडियों में व्यापरियों ने आंदोलन की भी चेतावनी दी हैं, इसके अलावा मंडियों को भी बन्द किया गया हैं।


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