दिल्ली।
आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश कर दिया हैं। इस बजट से सबसे ज्यादा उम्मीद देश के किसानों को थी, क्योंकि इन चुनावों में सबसे ज्यादा चर्चित मुद्दा किसानों का ही रहा, लेकिन किसान के साथ आज फिर धोखा-सा हुआ है, क्योंकि इस बजट में किसानों को सही तरीके से कुछ भी नहीं दिया गया हैं। शाब्दिक शब्दो मे कहे तो किसान खाली हाथ ही रह गया या किसान एक बार फिर लूट गया।
इस बजट में ना तो किसानों की आय दुगुनी करने का रोड़ मैप तैयार हुआ और न ही किसानों को समर्थन मूल्य कैसे मिलेगा, इसका रोड़ मैप तैयार नहीं हुआ? हालांकि बजट में यह बोला गया कि किसानों की आय दुगुनी होगी, लेकिन यह कैसे होगा? इस पर कोई चर्चा नहीं की गई। जैसे साल 2014 में किसानों को उनकी आय दुगुनी करने का वादा किया गया था, ठीक वैसे ही आज बजट में किसानों की आय दुगुनी करने का कहा गया हैं। इसके अलावा इस बार पूरे देश मे बारिश कम हुई हैं, हर साल जून में पर्याप्त बारिश हो जाती हैं, जो इस बार नहीं हुई हैं। तो सरकार ने सूखे से पीड़ित किसानों के लिए बजट में एक शब्द तक नहीं बोला गया।
हाल ही में सरकार ने खरीफ की फसलों के लिए समर्थन मूल्य बढ़ाने का दावा किया गया था, लेकिन असल मे समर्थन मूल्य सिर्फ 6 प्रतिशत किसानों को ही मिल पाता हैं? बाकी 94 प्रतिशत किसानों को समर्थन मूल्य नहीं मिल पाता हैं, वो किसान अपनी फसल का सही दाम कभी नहीं पा पाते है। इसके अलावा उम्मीद की जा रही थी कि किसान सम्मान निधि योजना की राशि इस बजट में बढ़ाई जा सकती हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
इसके अलावा आत्महत्या कर रहे किसानों के लिए भी इस बजट में एक शब्द नहीं बोला गया, न ही मंडियों और भंडारण की क्षमता बढ़ाने की बात हुई और न ही किसानों के द्वारा पाले जा रहे पशुओ को लेकर बात हुई, इसके अलावा कृषि ऋण को ब्याज मुक्त जाने की बात हुई। इस प्रकार इस बजट में किसानों के लिए कोई चर्चा नहीं की गई।

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