नागौर, राजस्थान।
लोकसभा चुनावों का परिणाम 23 मई को देश के सामने होगा, लेकिन उससे पहले हम राजस्थान की हॉट सीट नागौर पर कुछ समीकरणों के जरिये चर्चा करते है। नागौर सीट पर एनडीए के बेनीवाल और कांग्रेस की मिर्धा के बीच कड़ी टक्कर बताई जा रही हैं। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का कहना हैं कि दोनों प्रत्याशियों में हार और जीत का अंतर 10 से 20 हजार ही होगा। इस हिसाब से नागौर में दोनों ही उमीदवारों के बीच कड़ी टक्कर हैं। इस सीट पर कौन जीतेगा, यह तो हम कह नहीं सकते, लेकिन जातीय समीकरण हम आज यहां दे रहे है
जातीय समीकरण नागौर में कुछ इस तरह बने
बेनीवाल राज्य स्तर के बड़े नेता के तौर पर उभरे है और मिर्धा नागौर में ही हैं। लेकिन फिर भी मिर्धा बेनीवाल को टक्कर दे रही हैं, तो आखिर ऐसा क्या है कि मिर्धा बेनीवाल के साथ मुकाबला कर रही हैं। बेनीवाल समर्थक खुद मान रहे है कि मिर्धा भी 5 लाख वोट तो ले रही हैं, हालांकि इन लोगों ने बेनीवाल की जीत 1 लाख से ज्यादा बताई हैं। लेकिन आखिर ऐसा क्या है कि मिर्धा के पास इतने वोट आ रहे है, आज हम इस पर चर्चा कर रहे है।
ज्योति मिर्धा-
मिर्धा कांग्रेस की प्रत्याशी हैं, इसलिए कांग्रेस के वोटर के साथ-साथ मिर्धा के साथ कुछ जातियां भी आई हैं। नागौर में 2.5 लाख के लगभग मुस्लिम समुदाय के वोटर हैं। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अपनी परम्परागत पार्टी कांग्रेस को ही वोट दिया हैं। वहीं नागौर में 3 लाख से ज्यादा एससी के वोटर हैं, जिनमे सबसे ज्यादा मेघवाल हैं। मेघवाल समाज ने भी इन चुनावों में कांग्रेस को एकतरफा वोट दिया हैं। इसके अलावा जाट समाज के बुजुर्गों में कांग्रेस का वजूद आज भी मौजूद है। जाट समाज के कुल वोटों में 30 प्रतिशत वोट मिर्धा के खाते में भी गए है। वहीं राजपूत समाज ने अंतिम दिनों में बेनीवाल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और ना चाहते हुए भी राजपूत समाज ने हनुमान बेनीवाल को हराने के लिए मिर्धा को वोट दिया। राजपूत समाज के भी 2.5 लाख वोटर नागौर में हैं। इसमें से 3 समुदाय ने कांग्रेस को एकतरफा वोट दिया हैं, तो कुछ हद तक जाट वोटर भी कांग्रेस में गए है।
हनुमान बेनीवाल-
बेनीवाल एनडीए के उम्मीदवार हैं, इसलिए उनके साथ रालोपा और भाजपा का कार्यकर्ता साथ हैं, तो सबसे ज्यादा जाट समाज ने बेनीवाल को वोट किया। नागौर में सबसे ज्यादा जाट ही बाहुल्य संख्या में है। जाट समाज के अलावा ब्राम्हण, बनिये समाज ने भाजपा के हिसाब से बेनीवाल को वोट किया हैं। एससी में से नाइ, नायक जैसे छोटे समुदायों ने भी बेनीवाल को वोट किया हैं। बेनीवाल को कुमावत समाज का वोट काफी मिल सकता था, लेकिन सरोज प्रजापत के निर्दलीय लड़ने के कारण बेनीवाल को इस समाज से काफी नुकसान हुआ है। नावां और कुचामन क्षेत्र में काफी संख्या में कुमावत हैं और सरोज प्रजापत कुचामन से ही हैं। वहीं बेनीवाल की पकड़ से राजपूत और मुस्लिम वोटर दूर ही रहा।
इन्हीं जातियों समीकरणों ने बेनीवाल और मिर्धा के बीच कड़ा मुकाबला बनाया हैं। हालांकि जीत किसकी होगी यह 23 मई को पता लगेगा, लेकिन जातियों के वोटर इसी तरह गए है। नागौर सीट को एग्जिट पोल में बेनीवाल के खाते म दिखाया हैं, लेकिन जीत का अंतर काफी कम ही बताया हैं। ऐसे में इस सीट पर अभी भी संयम बरकरार हैं।

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