राजस्थान प्रदेश में चल रहा सियासी घटनाक्रम अभी भी जारी है। अभी इस घटनाक्रम का परिणाम भविष्य में छिपा हुआ है। अगर पायलट नई पार्टी बनाते है या फिर भाजपा में जाते है, तो ऐसे स्थिति में उनकी विधानसभा से सदस्यता जाना लगभग तय है और फिर हो सकते है राजस्थान की इन 19 सीटों पर उपचुनाव। उपचुनाव लगभग 6 महीने के अंतराल पर होंगें। पायलट ने यह तो साफ कर दिया है कि वो बीजेपी में कभी नहीं जाएंगे, इसलिए उनके पास एक ही अच्छा रास्ता है और वो है कि पायलट राजस्थान में एक नया थर्ड फ्रंट बना ले। पार्टी बनाने के बाद उपचुनाव में पायलट कुछ लोगों के साथ मिलकर राजस्थान में धमाका कर सकते है।
पायलट के साथ मिलकर ये जोड़ी ला सकती है प्रदेश में सियासी भूचाल
अगर राजस्थान में उपचुनाव होते है तो पायलट राजस्थान के बड़े नेताओं के साथ मिलकर कांग्रेस और बीजेपी को।कड़ी चुनौती दे सकते है। पायलट का राजस्थान के पूर्वी जिलों में काफी ज्यादा प्रभाव है। राजस्थान के टोंक, सवाईमाधोपुर, भीलवाड़ा, अजमेर, दौसा, धौलपुर जैसे जिलों में गुर्जरों की जनसंख्या काफी है, ऐसे में पायलट को गुर्जरों का फायदा मिल सकता। इसके अलावा किरोड़ी मीणा का भी मीणा समुदाय का खासा प्रभाव है। किरोड़ी मीणा अभी बीजेपी से राज्यसभा सांसद है, लेकिन अगर पायलट थर्ड पार्टी बनाते है और मीणा बीजेपी में ही रहते है, तो उनका वोट बैंक जा सकता है और पायलट के ऐसा करने से भविष्य में किरोड़ी मीणा के लिए नया खतरा पैदा हो सकता है।
किरोड़ी मीणा पायलट का इस समय साथ भी दे रहे है और इस तरह के बयान दे रहे है। अगर किरोड़ी मीणा भी पायलट के साथ मिल गए तो मीणा समाज और गुर्जर समाज एक साथ आ सकता है, जिसके कारण राजस्थान के पूर्वी भाग में एसटी-गुर्जर समन्वय बन सकता है। पायलट के साथ मीणा समाज के कई विधायक भी है, इनमें रमेश मीणा, मुरारीलाल मीणा, पी आर मीणा, जी आर खटाना। इस तरह पायलट के साथ पहले से मीणा समाज के नेता मौजूद है, ऐसे में किरोड़ी मीणा को भी पायलट के साथ मजबूरी में आना पड़ सकता है।
दूसरी ओर भरतपुर के महाराजा और डीग से विधायक विश्वेन्द्र भी पायलट के साथ है। विश्वेन्द्र सिंह जाट समाज के बड़े नेता है और उनका प्रभाव भरतपुर और धौलपुर में काफी ज्यादा है। इसलिए इन क्षेत्रों में जाट जाति के वोट भी पायलट की पार्टी आराम से साध सकती है। इसके अलावा हनुमान बेनीवाल की पार्टी RLP भी पायलट के साथ मिल सकती है, अभी बेनीवाल लगातार पायलट के पक्ष में ही बयान दे रहे है, हालांकि अभी वो बीजेपी के साथ है, लेकिन उपचुनाव की स्थिति में बेनीवाल की पार्टी भी इस मोर्चे के साथ मिल सकती है। बेनीवाल का नागौर, बाड़मेर, बीकानेर और जोधपुर जिले में काफी प्रभाव है।
इस तरह अगर उपचुनाव की स्थिति में सचिन पायलट, किरोड़ी मीणा, विश्वेन्द्र सिंह और हनुमान बेनीवाल मिलकर राजस्थान की राजनीति में एक बड़ा सियासी भूचाल ला सकते है। अगर यह मोर्चा मिल जाये तो बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए बड़ी मुश्किलें पैदा हो सकती है। दोनों ही पार्टीयो को उपचुनाव में मार खानी पड़ सकती है। हालांकि यह अभी कयास लगाए जा रहे है, प्रदेश में आगे क्या होगा, यह तो भविष्य में ही पता चलेगा।

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