जयपुर, राजस्थान।
आज से 2 साल पहले 29 अक्टूबर 2018 को राजस्थान में एक नई पार्टी 'राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी 'का गठन किया गया। इस पार्टी का गठन एक बड़ी किसान हुँकार महारैली में तत्कालीन खींवसर विधायक और वर्तमान नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने किया था। इस पार्टी का गठन लाखों किसानों की मौजूदगी में किया गया था। राजस्थान विधानसभा चुनाव से ठीक एक महीने पहले इस पार्टी का राजस्थान में तीसरे मोर्चे के रूप में गठन किया गया। पार्टी के मुखिया हनुमान बेनीवाल राजस्थान में कई मुद्दों को लेकर एक लम्बी लड़ाई लड़ी, उन्होंने इस दौरान राजस्थान में 5 बड़ी रैलियां की और अंतिम रैली में जयपुर में आयोजित की गई, इसी रैली में बेनीवाल ने अपनी पार्टी का गठन किया, जिसका नाम राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी रखा गया और चुनाव चिन्ह पानी की बोतल रखा गया।
रालोपा का पहला चुनाव- राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018
हनुमान बेनीवाल की इस पार्टी ने अपना पहला चुनाव राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 लड़ा। इस चुनाव में बेनीवाल ने राजस्थान में कांग्रेस और भाजपा के खिलाफ एक नई जंग छेड़कर यह चुनाव लड़ा। इस चुनाव में रालोपा ने राजस्थान में 57 विधानसभा सीटों पर अपने उमीदवार उतारे। पार्टी में प्रचार करने के लिए हनुमान बेनीवाल ही थे, उन्होंने जगह-जगह जाकर पार्टी और उनके प्रत्याशियों के लिए प्रचार किया। बेनीवाल ने इस चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर कई आरोप लगाए। इस चुनाव में बेनीवाल 57 सीटों में से सिर्फ 3 सीटें ही निकाल पाए, इनमें से एक सीट उनकी खुद की सीट खींवसर विधानसभा सीट थी।
जोधपुर जिले की भोपालगढ़ सीट पर रालोपा के पुखराज गर्ग विधायक बने तो नागौर की मेड़ता सीट पर रालोपा की इंदिरा देवी बावरी विधायक बनी। बाकी बाड़मेर की बायतु सीट और नागौर की जायल सीट पर रालोपा दूसरे स्थान पर रही। हालांकि बेनीवाल इस चुनाव में कुछ खास नहीं कर सके। इसके बाद उन्होंने उन्हीं पुराने तेवरों के साथ राजस्थान विधानसभा में अपनी पहचान बरकरार रखी। लोकसभा चुनावों तक बेनीवाल ने राजस्थान प्रदेश में राजनीति की।
लोकसभा चुनाव 2019 : RLP की स्थिति
जैसे ही लोकसभा चुनाव का बिगुल राजस्थान में बजा तो हनुमान बेनीवाल ने राजस्थान की सभी 25 सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा कर दिया। बेनीवाल ने यह भी कह दिया कि वो किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेंगें। हालांकि उसके बाद लोकसभा चुनाव से पहले बेनीवाल की कांग्रेस और भाजपा से गठबंधन की बात चली। आखिर में बेनीवाल ने भाजपा से गठबंधन कर लिया। भाजपा ने रालोपा को एक सीट नागौर लोकसभा सीट और हनुमान बेनीवाल को यहाँ से उमीदवार बनाया। बाकी जगहों पर भाजपा के लिए प्रचार करने की सहमति बन गई। हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए प्रचार भी किया और भाजपा नेताओं ने बेनीवाल के लिए भी प्रचार किया।
इस चुनाव में हनुमान बेनीवाल पहली बार नागौर से सांसद बने और उनके साथ भाजपा ने बाकी की 24 सीटें भी निकाल ली। इससे राजस्थान की नई सरकार गहलोत सरकार कक बड़ा झटका लगा, क्योंकि उनको एक सीट भी नहीं मिली, यहाँ तक कि गहलोत के बेटे वैभव गहलोत भी चुनाव हार गए। संसद पहुँचने पर बेनीवाल ने केंद्र में बड़े नेताओं से मिलना-जुलना भी शूरू किया। बेनीवाल NDA का हिस्सा भी थे, जिसके कारण वो एनडीए की मीटिंग में भाग लेते और भाजपा नेताओं के साथ मुलाकात भी करते। संसद की कार्यवाही में बेनीवाल खूब बढ़चढ़कर बोलते और प्रधानमंत्री नरेंद्र की काफी तारीफे भी करते।
राजस्थान की क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा: राजस्थान की पहली पार्टी
लोकसभा चुनावों के बाद हनुमान बेनीवाल की पार्टी को चुनाव आयोग ने क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा दिया। वही रालोपा राजस्थान की पहली क्षेत्रीय पार्टी बनी, तो देश की 59 वीं क्षेत्रीय पार्टी बनी। लोकसभा चुनाव में चुनाव आयोग ने हनुमान बेनीवाल की पार्टी का चुनाव चुन्ह बोतल से बदलकर टायर कर दिया था, लेकिन क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा मिलते ही बेनीवाल की पार्टी रालोपा को उसका पुराना चुनाव चिन्ह बोतल वापस मिल गया।
जोधपुर में वार्ड नम्बर 25 में जिला परिषद सदस्य के लिए उपचुनाव होने थे। इस उपचुनाव में बेनीवाल की पार्टी रालोपा ने उपचुनाव लड़ने का फैंसला किया। जिला परिषद सदस्य के लिए रालोपा ने अपनी पार्टी के नेता राजूराम खोजा की पत्नी अनिता चौधरी को उमीदवार बनाया। इस उपचुनाव में भी रालोपा ने भाजपा और कांग्रेस दोनों को चुनाव हराकर जीत दर्ज की।
विधानसभा उपचुनाव: रालोपा की एक और उपलब्धि
अक्टूबर 2019 में राजस्थान की 2 सीटों पर उपचुनाव हुए थे, इनमें एक सीट खींवसर विधानसभा सीट हैं, जो बेनीवाल के सांसद बनने के बाद खाली हुई थी, दूसरी नरेंद्र खीचड़ के सांसद बनने से झुंझनु की मण्डावा सीट। इस उपचुनाव में भाजपा- रालोपा ने गठबंधन को बरकरार रखा और उपचुनाव में 1-1 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैंसला हुआ। रालोपा ने खींवसर सीट पर चुनाव लड़ने का फैंसला किया, तो भाजपा ने मण्डावा सीट पर उपचुनाव लड़ने के फैंसला किया। इस उपचुनाव में भाजपा-रालोपा ने मिलकर उपचुनाव लड़ा।
इस उपचुनाव में हनुमान बेनीवाल ने अपने छोटे भाई नारायण बेनीवाल को खींवसर विधानसभा सीट से उमीदवार बना दिया। इस उपचुनाव में नारायण बेनिवाल ने खींवसर सीट से जीत दर्ज की, तो मण्डावा सीट भाजपा हार गई और कांग्रेस ने मण्डावा सीट पर कब्जा किया। इस उपचुनाव में हनुमान बेनीवाल के भाई नारायण बेनीवाल भी विधायक बन गए और विधानसभा में फिर से 3 सदस्य रालोपा के हो गए।
रालोपा की वर्तमान स्थिति: जाने क्या हो रहा हैं फिलहाल?
वर्तमान में राजस्थान में नगर निगम के चुनाव होने जा रहे हैं, रालोपा भी इन चुनावों में भाग ले रही हैं। अंतिम समय मे सांसद बेनीवाल ने चुनाव लड़ने का फैंसला किया था। रालोपा ने जयपुर और जोधपुर में कुल 31 प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं, आज इसके लिए मतदान भी होगा और 3 नवम्बर को इस चुनाव का परिणाम सामने आएगा, तभी पता लगेगा कि रालोपा कितने वार्डों पर कब्जा कर पाती हैं या नहीं? लेकिन इस चुनाव की खास बात यह हैं कि रालोपा इस बार बिना गठबंधन के चुनाव लड़ रही हैं। बीजेपी और रालोपा नगर निगम चुनाव अकेले-अकेले लड़ रही हैं। फिलहाल जयपुर में हनुमान बेनीवाल पार्टी विस्तार को लेकर भी मीटिंग करते नजर आ रहे हैं।
रालोपा: भविष्य की रणनीति
रालोपा को आज 2 साल पूरे हो गए हैं। नवम्बर अंतिम और दिसम्बर शुरुआत में राजस्थान में जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्य के चुनाव होने जा रहे हैं। RLP के पास यह सबसे अच्छा मौका हैं, हनुमान बेनीवाल ने यह चुनाव लड़ने का फैंसला कर दिया, बेनीवाल के तेवरों को देखते हुए RLP यह चुनाव अकेले ही लड़ेगी। RLP का गांवों में काफी आधार हैं, ऐसे में काफी जगहों पर हनुमान बेनीवाल की पार्टी अपनी छाप छोड़ सकती हैं, कई पंचायत समितियों में अपने प्रधान बना सकती हैं, इससे उनकी पार्टी की पहुंच भी काफी दूर तक जा सकती हैं। कुल 21 जिलों में यह चुनाव होंगें, ऐसे में यह RLP के लिए काफी सुनहरा अवसर हैं। विधानसभा चुनाव 2023 से पहले हर क्षेत्र में चुनाव लड़ना RLP के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता हैं।
वही अगर हम RLP की कमियों पर नजर डाले तो अब भी RLP अपनी पार्टी का विस्तार नहीं कर पाई हैं। कार्यकारिणी के नाम पर RLP ने 1 साल पहले एक छोटी सी कार्यकारिणी बनाई, जिसमें RLP के खास नताओ को शामिल किया, लेकिन यह कार्यकारिणी आज भी अधूरी हैं, जो RLP की सबसे बड़ी कमी हैं। आज भी RLP के पास राज्य स्तर, जिला स्तर और तहसील-ब्लॉक स्तर पर कार्यकारिणी नहीं हैं, जबकि पार्टी को बने हुए 2 साल हो चुके है। आखिर कब तक हनुमान बेनीवाल अपनी पार्टी को ऐसे चलाएंगे? अगर समय रहते हनुमान बेनीवाल ने पार्टी का विस्तार नहीं किया तो इसका असर 2023 के चुनावों में साफ साफ नजर आएगा।








Tnxx for comment